मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त रिकवरी देखी गई. शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद, बाजार अंततः शानदार बढ़त के साथ बंद हुआ. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया.
बाजार का लेखा-जोखा
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 509.73 अंक (0.69%) की मजबूती के साथ 74,616.58 पर बंद हुआ. दिन के दौरान सेंसेक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया; यह 74,686.32 के उच्च स्तर और 73,282.41 के निचले स्तर के बीच झूलता रहा, जो करीब 1,403.91 अंकों की हलचल को दर्शाता है.
इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 155.40 अंक (0.68%) उछलकर 23,123.65 के स्तर पर बंद हुआ.
आईटी शेयरों ने संभाली कमान
आज की रिकवरी का मुख्य श्रेय आईटी क्षेत्र को जाता है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आईटी शेयरों ने एक ‘डिफेंसिव एंकर’ के रूप में काम किया, जिससे शुरुआती घाटे की भरपाई संभव हो सकी. सेंसेक्स की दिग्गज कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएल टेक (HCL Tech) और इंफोसिस शीर्ष लाभार्थियों में शामिल रहे. इनके अलावा भारती एयरटेल, सन फार्मा और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखी गई.
दूसरी ओर, इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo), अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाइटन जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और ये पिछड़ने वाले शेयरों की सूची में रहे.
वैश्विक संकेतों का असर
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.71% गिरकर 109 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और शंघाई कंपोजिट बढ़त के साथ बंद हुए. यूरोपीय बाजार भी सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे.
संस्थानिक निवेशकों की भूमिका
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 8,167.17 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 8,088.70 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने का प्रयास किया.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी ने शॉर्ट-कवरिंग और चुनिंदा सेक्टर्स में मजबूती के कारण शुरुआती नुकसान को पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, व्यापक स्तर पर खरीदारी की कमी अभी भी देखी जा रही है.


