Friday, March 20, 2026

शुक्रवार को आईटी शेयरों में तेजी से सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त पर बंद हुए, लेकिन ईरान-इजरायल तनाव और गिरते रुपये ने बाजार का उत्साह घटाया.

Share

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा. शुरुआती तेजी के बाद बाजार ने आखिरी घंटों में अपनी बढ़त का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया. इसके बावजूद, आईटी सेक्टर में आई जोरदार खरीदारी की बदौलत प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद होने में सफल रहे.

बाजार का अंतिम आंकड़ा
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बीएसई (BSE) का सेंसेक्स 325.72 अंक (0.44%) की बढ़त के साथ 74,532.96 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 112.35 अंक (0.49%) चढ़कर 23,114.50 के स्तर पर स्थिर हुआ. बाजार एक समय इससे कहीं अधिक ऊपर था, लेकिन ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने निवेशकों के उत्साह पर पानी फेर दिया.

आईटी सेक्टर ने संभाला मोर्चा
आज के कारोबार की सबसे बड़ी विशेषता आईटी इंडेक्स रही, जो 2.17% की बढ़त के साथ बंद हुआ. वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और एक्सेंचर के बेहतर नतीजों के बाद घरेलू आईटी कंपनियों जैसे टेक महिंद्रा, टीसीएस और इन्फोसिस में अच्छी खरीदारी देखी गई. इसके अलावा फार्मा और सरकारी बैंकों ने भी बाजार को सहारा दिया.

कच्चे तेल और युद्ध की आहट का असर
दोपहर बाद ईरान और इजरायल के बीच ताजा हमलों की रिपोर्ट आने से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंताएं बढ़ गईं. इसी डर से अंतिम एक घंटे में भारी बिकवाली हुई और रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा (करीब 1%) टूट गया.

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार की बढ़त के बीच भारतीय रुपये के लिए आज का दिन बेहद खराब रहा. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 1.17% गिरकर 93.71 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अस्थिरता रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,350 का स्तर एक बड़ी बाधा बना हुआ है. जब तक बाजार इसके ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक हर उछाल पर बिकवाली का डर रहेगा. नीचे की तरफ 23,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है. यदि निफ्टी इससे नीचे फिसलता है, तो यह 22,900 तक जा सकता है

निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे फिलहाल सतर्क रहें और मध्य-पूर्व के घटनाक्रमों के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर कड़ी नजर रखें.

Table of contents [hide]

Read more

Local News