Saturday, February 14, 2026

शादी-ब्याह के सीजन की शुरुआत से पहले सर्राफा बाजार से निवेशकों और खरीदारों के लिए मिली-जुली खबरें आ रही हैं.

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मुंबई: फरवरी का यह हफ्ता सर्राफा बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में 1.82% की बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है. जहां हफ्ते की शुरुआत में सोना ऊंचाई पर था, वहीं शुक्रवार तक आते-आते इसमें निवेशकों की सावधानी और मुनाफावसूली साफ देखी गई.

क्या रहे हफ्ते भर के रेट्स?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को 24 कैरेट सोने (10 ग्राम) की कीमत ₹1,55,593 थी, जो शुक्रवार तक गिरकर ₹1,52,765 पर आ गई. यानी महज पांच दिनों में प्रति 10 ग्राम पर करीब ₹2,800 से ज्यादा की कमी आई है. हालांकि, शुक्रवार को निचले स्तरों से हल्की रिकवरी जरूर दिखी और MCX पर सोना ₹1,56,200 के करीब बंद हुआ.

चांदी ने भरी ऊंची उड़ान
सोने में जहां सुस्ती रही, वहीं चांदी ने निवेशकों को मालामाल कर दिया. शुक्रवार को MCX पर चांदी के मार्च वायदा में 3.62% की जबरदस्त तेजी देखी गई, जिससे इसका भाव ₹2,44,999 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), सोलर एनर्जी और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसे क्षेत्रों में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग इसके दाम को लगातार सपोर्ट दे रही है.

US CPI डेटा का असर
बाजार में आई इस हलचल के पीछे अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़े (CPI Data) अहम रहे. जनवरी 2026 में अमेरिका की महंगाई दर 2.40% रही, जो बाजार के अनुमान (2.50%) से कम है. महंगाई कम होने से उम्मीद जगी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है. इस खबर के बाद डॉलर पर दबाव बढ़ा और शुक्रवार शाम को सोने-चांदी की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला.

एक्सपर्ट की राय: क्या करें निवेशक?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के अनुसार, सोने के लिए ₹1,60,000 का स्तर एक बड़ी बाधा (Resistance) बना हुआ है. जब तक भाव ₹1,56,000 के ऊपर नहीं टिकता, तब तक यह दोबारा ₹1,51,000 के स्तर तक फिसल सकता है.

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोना और चांदी अब 3 से 5 साल की लंबी तेजी (Bull Run) में प्रवेश कर चुके हैं. केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी और ग्लोबल डिमांड को देखते हुए, एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा कीमती धातुओं में जरूर रखें. किसी भी बड़ी गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखा जाना चाहिए.

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