Monday, March 9, 2026

वैज्ञानिकों ने पाया कि विशाल तारा WOH G64 रेड सुपरजायंट से येलो हाइपरजायंट बन चुका है और भविष्य में सुपरनोवा विस्फोट संभव है.

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 ब्रह्मांड के सबसे विशाल तारों में से एक WOH G64 को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण खोज की है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी से पता चला है कि यह विशाल तारा अब अपने जीवन के अंतिम स्टेज की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह एक विस्फोटक सुपरनोवा में बदल सकता है.

यह रिसर्च एथेंस के नेशनल ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक गोंजालो मुन्योस-सांचेज़ की अगुवाई में की गई है इसके नतीजे प्रतिष्ठित जर्नलम Nature Astronomy में पब्लिश हुए हैं. स्टडी के मुताबिक, साल 2014 के आसपास इस तारे में एक बड़ा बदलाव देखा गया. पहले इसे एक रेड सुपरजायंट यानी बेहद विशाल और ठंडा तारा माना जाता था, लेकिन अब यह एक बेहद दुर्लभ येलो हाइपरजायंट में बदल चुका है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि तारा अपने अंतिम विस्फोट यानी सुपरनोवा के करीब पहुंच रहा है.

Image of the star WOH G64 taken by the VLTI

WOH G64 की खोज 1980 के दशक में हुई थी. उस समय वैज्ञानिकों ने पाया कि यह असाधारण रूप से विशाल और ठंडा तारा है. इसका आकार इतना बड़ा है कि इसका रेडियस हमारे सूर्य से लगभग 1500 गुना ज्यादा है. द्रव्यमान के मामले में भी यह सूर्य से करीब 28 गुना भारी है. इसी वजह से इसे ब्रह्मांड के सबसे बड़े ज्ञात तारों में गिना जाता है.

यह तारा लार्ज मैजेलैनिक क्लाउड में स्थित है, जो हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे की एक सैटेलाइट गैलेक्सी है. खास बात यह है कि WOH G64 हमारी गैलेक्सी के बाहर का पहला ऐसा तारा था जिसकी विस्तृत तस्वीर ली गई थी.यह तस्वीर Very Large Telescope Interferometer की मदद से ली गई थी. इस तस्वीर में तारे के चारों ओर धूल का एक घना घोल दिखाई दिया था, जिससे यह पुष्टि हुई कि तारा उम्र बढ़ने के साथ लगातार अपना द्रव्यमान खो रहा है.

50 लाख साल से भी कम उम्र

इसमें दिलचस्प बात यह है कि इतना विशाल होने के बावजूद यह तारा उम्र में काफी युवा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसकी उम्र 50 लाख साल से भी कम है. तुलना के लिए हमारा सूर्य करीब 4.6 अरब साल पुराना है. विशाल तारे आम तौर पर बहुत तेज जलते हैं और इसलिए उनका जीवनकाल छोटा होता है. यही कारण है कि WOH G64 भी उम्मीद से कम समय में ही अपने अंत समय तक पहुंच सकता है.

पिछले करीब 20 सालों में इस तारे में कई बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं. इसके स्पेक्ट्रम में बदलाव देखा गया है और उसकी सतह पर तापमान 1000 केल्विन तक बढ़ गया है. 2010 के बाद से OGLE प्रोजेक्ट की निगरानी में यह भी पाया गया कि तारे की नियमित चमक में होने वाला उतार-चढ़ाव अचानक खत्म हो गया. इसके साथ ही तारे के रंग में भी बदलाव देखा गया, जो तापमान बढ़ने से जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

Location of the star WOH G64 in the Large Magellanic Cloud

2011 में एक अहम घटना हुई, जब इस तारे की चमक अचानक कम हो गई. हालांकि, 2013 से 2014 के बीच इसकी चमक फिर से पहले जैसी हो गई. इसी दौरान वैज्ञानिकों को इसके स्वरूप में बड़ा बदलाव दिखाई दिया, जिसने इसे रेड सुपरजायंट से येलो हाइपरजायंट की कैटेगिरी में ला दिया. इस बदलाव के पीछे वैज्ञानि दो संभावित कारण बता रहे हैं. पहली संभावना यह है कि यह एक बाइनरी सिस्टम यानी दो तारों वाला सिस्टम हो सकता है यानी पहले यह एक ही विशाल तारे जैसा दिखाई देता था, क्योंकि बड़े तारे की बाहरी परत ने अपने साथी तारे को ढक लिया था. बाद में बाहरी परतें बाहर निकल गईं और सिस्टम फिर से जो तारों के रूप में दिखाई देने लगा.

इसकी दूसरी संभावना यह है कि इस तारे ने बहुत पहले बड़ी मात्रा में पदार्थ बाहर फेंका था, जिसने लंबे समय तक पूरे सिस्टम को ढक रखा था. समय के साथ जब यह पदार्थ छंट गया तो तारा दो अलग-अलग तारों वाले सिस्टम के रूप में दिखाई देने लगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में WOH G64 का अंत संभवत: सुपरनोवा विस्फोट के रूप में हो सकता है. हालांकि, एक संभावना यह भी है कि यह अंतत: ब्लैक होल में भी बदल सकता है. आने वाले सालों में लगातार निगरानी से इस बात को समझने में मदद मिलेगी कि इतने बड़े और विशाल तारे आखिर अपने जीवन का अंत कैसे करते हैं.

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