Friday, March 27, 2026

वैज्ञानिकों ने एबीलेक हाइब्रिड प्रोटीन बनाया, जो कैंसर कोशिकाओं पर प्रतिरक्षा रुकावट हटाकर प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय करता है।

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आजकल कैंसर सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है. खासकर, हमारे देश में हर साल 1.4 मिलियन से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जबकि अनुमान है कि हर साल 9 मिलियन से ज्यादा लोग इस बीमारी से अपनी जान गंवा देते हैं. कैंसर अक्सर शरीर में चुपचाप पनपता है. यह बीमारी काफी खतरनाक और जानलेवा है, लेकिन कैंसर मरीजों के लिए अच्छी खबर है. एक नई रिसर्च से पता चलता है कि कुछ सबसे आम तरह के कैंसर का इलाज इम्यूनोथेरेपी के एक नए तरीके से सफलतापूर्वक किया जा सकता है. मतलब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिससे कैंसर का इलाज ज्यादा असरदार तरीके से किया जा सकता है…

MIT और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने कैंसर सेल्स पर शुगर-बेस्ड इम्यून “ब्रेक” को डिसेबल करके इम्यून सिस्टम को ट्यूमर सेल्स पर हमला करने के लिए स्टिमुलेट करने का एक नया तरीका डेवलप किया है. यह स्ट्रैटेजी इम्यूनोथेरेपी के फायदों को ज्यादा मरीजों तक पहुंचा सकती है. नेचर बायोटेक्नोलॉजी जर्नल में पब्लिश इस स्टडी के अनुसार, यह एक ऐसा तरीका है जो कैंसर इम्यूनोथेरेपी को और भी ज्यादा मरीजों के लिए असरदार बना सकता है. टीम ने बताया कि उनके तरीके का मुख्य हिस्सा उस “ब्रेक” को उलटना है जो कैंसर सेल्स इम्यून सेल्स को हमला करने से रोकने के लिए लगाते हैं.

यह प्रोसेस ग्लाइकन्स नाम के शुगर मॉलिक्यूल्स द्वारा कंट्रोल होता है, जो कैंसर सेल्स की सतह पर पाए जाते हैं. लेक्टिन नाम के मॉलिक्यूल्स से ग्लाइकन्स को ब्लॉक करके, टीम ने दिखाया कि वे कैंसर सेल्स के प्रति इम्यून सिस्टम के रिस्पॉन्स को “काफी बढ़ा” सकते हैं. इसे हासिल करने के लिए, वैज्ञानिकों ने AbLects नाम के मल्टीफंक्शनल मॉलिक्यूल्स बनाए, जो एक लेक्टिन को ट्यूमर-टारगेटिंग एंटीबॉडी के साथ जोड़ते हैं और कैंसर कोशिकाओं पर प्रतिरक्षा रुकावट हटाकर प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय करता है.

इस स्टडी की लीड लेखक और MIT की प्रोफेसर जेसिका स्टार्क ने कहा कि हमने एक नए तरह का प्रोटीन थेराप्यूटिक बनाया है जो ग्लाइकन-आधारित इम्यून चेकपॉइंट्स को ब्लॉक कर सकता है और कैंसर-रोधी इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ा सकता है. क्योंकि ग्लाइकन कई तरह के ट्यूमर में कैंसर के प्रति इम्यून रिस्पॉन्स को रेगुलेट करने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए हमें लगता है कि हमारा मॉलिक्यूल कई कैंसर रोगियों के लिए एक नया और शायद ज्यादा असरदार इलाज का विकल्प दे सकता है.

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह नई खोज भविष्य में कैंसर के इलाज को ज्यादा असरदार बना सकती है, जिससे उम्मीद की एक किरण जगी है, खासकर उन मरीजों के लिए जिन पर मौजूदा इम्यूनोथेरेपी काम नहीं कर रही है. अगर आगे के क्लिनिकल ट्रायल सफल होते हैं, तो यह टेक्नोलॉजी कैंसर के इलाज के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है. कैंसर कोशिकाओं द्वारा लगाए गए इम्यून ब्लॉक को हटाकर इम्यून सिस्टम को फिर से एक्टिव करना मेडिकल साइंस में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह नई टेक्नोलॉजी न सिर्फ मौजूदा दवाओं से ज्यादा असरदार है, बल्कि यह कई तरह के कैंसर के इलाज के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है. यह रिसर्च कैंसर के इलाज में नई उम्मीदों और संभावनाओं के दरवाजें खोलती है

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