Tuesday, April 7, 2026

विमान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के कारण एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर दूरी आधारित नया फ्यूल सरचार्ज लगाया है.

Share

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती लागत को देखते हुए एयर इंडिया ने अपने किरायों में संशोधन करने का निर्णय लिया है. एयर इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मंगलवार को घोषणा की कि वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मार्गों पर फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) में वृद्धि कर रहे हैं. यह नया नियम बुधवार, 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा.

घरेलू उड़ानों के लिए नया ढांचा
घरेलू मार्गों के लिए एयर इंडिया ने एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘फ्लैट सरचार्ज’ की जगह ‘दूरी-आधारित संरचना’ को अपनाया है. अब यात्रियों को उड़ान की दूरी के हिसाब से अतिरिक्त शुल्क देना होगा. सरकार द्वारा घरेलू एटीएफ की कीमतों में वृद्धि की सीमा 25 प्रतिशत तय किए जाने के बाद एयरलाइन ने यह नपा-तुला कदम उठाया है.

संशोधित दरों के अनुसार

  • 500 किमी तक की उड़ानों के लिए: ₹299
  • 501 से 1,000 किमी के लिए: ₹399
  • 1,001 से 1,500 किमी के लिए: ₹549
  • 1,501 से 2,000 किमी के लिए: ₹749
  • 2,000 किमी से अधिक की दूरी के लिए: ₹899

अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भारी बोझ
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की कीमतों पर कोई सरकारी नियंत्रण न होने के कारण, एयर इंडिया ने इन मार्गों पर अधिक वृद्धि की है. एयरलाइन ने इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मार्च के अंत तक वैश्विक जेट ईंधन की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 195.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं.

क्षेत्रवार अंतरराष्ट्रीय सरचार्ज इस प्रकार होंगे
उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: $280 (लगभग ₹23,000+)

  • यूरोप और ब्रिटेन: $205
  • अफ्रीका: $130
  • दक्षिण-पूर्व एशिया: $100
  • सार्क देश (बांग्लादेश को छोड़कर): $24

यात्रियों पर प्रभाव
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों ने इन नई तारीखों से पहले अपनी टिकट बुक कर ली है, उन पर इस वृद्धि का असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, यदि कोई यात्री अपनी यात्रा की तारीख बदलता है या टिकट को री-इश्यू कराता है, तो उसे नए सरचार्ज के अनुसार भुगतान करना होगा.

कंपनी का कहना है कि वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च हो रहा है. इंडिगो के बाद एयर इंडिया का यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय दबाव को दर्शाता है.

Read more

Local News