कहा गया था कि झारखंड के गरीब परिवारों को अबुआ आवास योजना के तहत घर दिए जाएंगे, लेकिन सच्चाई कुछ और है.
रांचीः झारखंड के गरीब परिवारों को साल 2022 से 2024 तक केंद्र की तरफ से प्रधानमंत्री आवास की सहयोग राशि नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने अपने बूते अबुआ आवास योजना की शुरुआत की थी. दो लाख रुपये की लागत से 31 वर्ग मीटर में तीन कमरों का पक्का मकान देने का वादा किया गया था. पिछले विधानसभा चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा बना. अब सवाल है कि क्या यह स्कीम उम्मीदों पर खरा उतर रही है. पिछले दो वर्षों में कितना था टारगेट? कितने लोगों को मिला आवास? वर्तमान वित्तीय वर्ष में क्या है योजना का हाल?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए अबुआ आवास योजना से जुड़े ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों को खंगाला गया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. लेकिन विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह इससे इत्तेफाक नहीं रखतीं. उन्होंने अबुआ आवास निर्माण की रफ्तार पर संतोष जताया है. लेकिन आंकड़े कुछ और ही बता रहे हैं
- सबसे पहले बात करते हैं वित्तीय वर्ष 2023-24 की. योजना की लॉन्चिंग 15 नवंबर 2023 को हुई थी. टारगेट था 2 लाख अबुआ आवास बनाने का. इसकी तुलना में 1,99,715 आवेदन स्वीकृत किए गये. लोगों में जबरदस्त उत्साह था. पहली किस्त के तौर पर 1,95,084 लाभुकों को 30-30 हजार की राशि दे दी गई. जब दूसरी किस्त की बारी आई तो लाभुकों की संख्या घटकर 1,81,224 हो गई. फिर तीसरी किस्त पाने वाले लाभुक घटकर 1,41,703 पर आ गये. जब आवास निर्माण का अंतिम पड़ाव आया तो यह संख्या घटकर 84,708 हो गई. इसका मतलब ये हुआ है कि 84,708 परिवारों को अबुआ आवास योजना के तहत पक्का छत मिल गया. लेकिन फिनिशिंग टच मद में 20 हजार रु लेने की बारी आई तो संख्या घटकर 34,084 हो गई.
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में अबुआ योजना का हाल बेहाल
- यह चुनावी वर्ष था. इस वर्ष लोकसभा के साथ-साथ झारखंड विधानसभा का भी चुनाव हुआ था. लिहाजा, राज्य सरकार ने 4 लाख 50 हजार अबुआ आवास बनाने का लक्ष्य रखा. इसकी तुलना में 4,32,508 लाभुकों के आवेदन स्वीकृत भी कर लिए गये. लेकिन पहली किस्त के तौर पर सिर्फ 2,97,380 लाभुकों को ही पैसे मिले. दूसरी किस्त की बारी आई तो यह संख्या घटकर 1,86,332 हो गई. तीसरी किस्त पाने की अहर्ता सिर्फ 53,946 लाभुक पूरी कर पाए. इसकी तुलना में सिर्फ 10,992 आवास का निर्माण कार्य पूरा हो पाया. आश्चर्य की बात है कि अबुआ आवास के फिनिशिंग टच मद में सिर्फ 1,821 लाभुक भी राशि ले पाए.
- विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का पक्ष
- विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 2022 से 2024 तक पीएम आवास योजना का लाभ देना बंद कर दिया था. इस वजह से राज्य सरकार ने अपने बूते अबुआ आवास योजना की शुरुआत की. उनके मुताबिक साढ़े छह लाख स्वीकृत आवास में से करीब 1 लाख 20 हजार आवास का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है.
- वहीं बड़ी संख्या में लोग सेकेंड और थर्ड इंस्टॉलमेंट लेकर निर्माण कार्य पूरा कर रहे हैं. ऐसा कहते हुए उन्होंने निर्माण कार्य की रफ्तार पर संतोष जताया है. साथ ही यह भी कहा है कि अब पीएम आवास भी बनना शुरु हुआ है. अब केंद्र सरकार अपना हिस्सा दे रही है. इसका लाभ भी लोगों को दिया जा रहा है. पीएम आवास के तहत 4 लाख 50 हजार आवास बनाना हैं. साथ ही विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य में 25 लाख आवास की जरूरत है. इसको चरणबद्ध तरीके से अगले पांच वर्षों में पूरा किया जाएगा.
अबुआ आवास के निर्माण की धीमी रफ्तार पर प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि बालू तो मिल ही नहीं रहा है. ऐसे में घर कैसे बनेगा. जिस दर से बालू बिक रही है, उस दर पर गरीबों का आवास बन ही नहीं सकता. सरकार को बताना चाहिए कि कितने लोगों का गृह प्रवेश हुआ है. राज्य सरकार की नीयत साफ नहीं है.
- केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास योजना के पैसे नहीं मिलने पर सीएम हेमंत सोरेन ने 15 अगस्त 2023 को घोषणा की थी कि उनकी सरकार जरूरतमंदों को पीएम आवास से काफी बेहतर तीन कमरे का आवास देगी. एक आवास को बनाने में 2 लाख रु खर्च होंगे. इसमें रसोई घर और टॉयलेट की भी सुविधा होगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद 23 जनवरी 2024 को खूंटी की धरती से इस योजना को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था. उस दिन खूंटी और सिमडेगा के कुछ जरुरतमंदों को आवास निर्माण से जुड़ी पहली किस्त भी जारी की गई थी. योजना के लॉन्च होते ही टारगेट के अनुरुप आवेदन भी आ गये थे. लेकिन आवास निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक लग गया.
- कैसे जारी होती है अबुआ आवास की राशि
- अबुआ आवास निर्माण के लिए प्रति लाभुक परिवार को चार किस्त में 2 लाख रु देने का प्रावधान है. पहली किस्त के तौर पर प्लिंथ निर्माण मद में 30 हजार रु. दिए जाते हैं. उनकी जियो टैगिंग होने के बाद लिंटेल (lintel) तक का निर्माण करने के लिए दूसरी किस्त के तौर पर 50 हजार निर्गत किए जाते हैं. इसके बाद छत ढलाई के लिए 1 लाख रु. दिया जाता है. मकान बन जाने के बाद फिनिशिंग टच के नाम पर 20 हजार रुपये का चौथा किस्त मिलता है.
- पीएम आवास योजना में घट रही है लोगों की दिलचस्पी
- प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों को एक आवास के बदले 1.20 लाख रु. तीन किस्त में दिए जाते हैं. पहली किस्त में 40 हजार, दूसरी में 70 हजार और तीसरी किस्त में 5 हजार रुपये मिलते हैं. इसके अलावा मनरेगा मद में 40 हजार रुपये मिलते हैं. लिहाजा, 1.45 लाख रुपये में 25 वर्ग मीटर में पक्का मकान बनाना होता है. इसकी तुलना में अबुआ आवास हर तरह से ज्यादा मुफीद है. इसलिए झारखंड में पीएम आवास योजना का लाभ लेने वाले की संख्या तेजी से घटी है. लोग स्वीकृत पीएम आवास को सरेंडर कर रहे हैं.
आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अबुआ आवास निर्माण की रफ्तार कैसी है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में एक उत्साह दिखा था. लेकिन अगले ही साल यानी 2024-25 में इसकी रफ्तार पर जैसे ब्रेक लग गया. खास बात है कि इतने गंभीर मसले पर विभाग का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. पिछले वित्तीय वर्ष के खराब परफॉर्मेंस पर दलील दी जाती है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की वजह से अबुआ आवास के निर्माण का काम प्रभावित हुआ है.
दूसरी तरफ झारखंड में बेघरों और कच्चा मकान में रहने वालों की संख्या काफी है. ऊपर से लगातार हो रही मानसून की बारिश की वजह से गरीबों के कच्चे आशियाने ताश के पत्ते की तरह भरभरा कर गिर रहे हैं. कई लोग जान गंवा चुके हैं. कई लोग इस डर से सरकारी स्कूलों में रात काट रहे हैं कि कहीं उनका कच्चा मकान भी न ढह जाए. जरूरतमंद जब प्रखंड ऑफिस पहुंचते हैं तो जवाब मिलता है कि लाभुकों की लिस्ट बहुत लंबी है. अभी आपका नंबर आने में वक्त लगेगा. इंतजार कीजिए- ‘ इंतजार ‘.


