नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक संकेत मिले हैं. प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि यह पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार इसे एक ‘स्वस्थ विकास दर’ माना जा रहा है.
घरेलू मांग और निजी निवेश का साथ
10वें ‘इंडिया आउटलुक कॉन्क्लेव’ में प्रस्तुत इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार इसकी घरेलू मांग है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी खपत, जो भारत की जीडीपी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा है, अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती रहेगी. क्रिसिल के एमडी और सीईओ अमीश मेहता के अनुसार, भारत ने बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद स्थिर विकास दिखाया है. हमारा अनुमान घरेलू काउंटरवेट्स, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे पर खर्च और निजी निवेश चक्र में तेजी पर आधारित है.
उभरते क्षेत्रों में निवेश का उछाल
रिपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता निजी पूंजीगत व्यय में आ रहा बदलाव है. अब निवेश केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 से 2031 के बीच औद्योगिक निवेश 1.5 गुना बढ़कर 9.1 लाख करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच सकता है. इसमें नए जमाने के उद्योगों की भूमिका अहम होगी.
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: इस क्षेत्र में निवेश में 4.7 गुना की भारी वृद्धि की उम्मीद है.
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV): ईवी विनिर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.1 गुना की बढ़ोतरी का अनुमान है.
- बैटरी निर्माण: एसीसी (ACC) बैटरी क्षेत्र में 3.3 गुना उछाल देखा जा सकता है.
महंगाई और चुनौतियां भी हैं
अर्थव्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति के 4.3 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है. हालांकि, नए 2024 बेस ईयर के कारण खाद्य वस्तुओं का भार कम होने से हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रण में रह सकती है. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता संरक्षणवाद, कच्चा तेल (75-80 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान) और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक विकास की राह में रोड़ा अटका सकते हैं.
निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य
भारत ने वित्त वर्ष 2031 तक अपने निर्यात को दोगुना कर 80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इसमें सेवाओं और नए व्यापार समझौतों की बड़ी भूमिका होगी. रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टर बेहतर सामर्थ्य और कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण शानदार प्रदर्शन करेंगे.


