Sunday, March 22, 2026

वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, टॉप 1 फीसदी आबादी के पास देश की 40 फीसदी संपत्ति है, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी मात्र 15.7फीसदी.

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नई दिल्ली: देश में अमीर और गरीब के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है. यह तथ्य वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026 में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आय असमानता दुनिया में सबसे ज्यादा है और देश की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा केवल कुछ ही लोगों के पास केंद्रित है.

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि देश के टॉप 10 फीसदी अमीर लोगों के पास लगभग 65 फीसदी संपत्ति है. वहीं, टॉप 1 प्रतिशत आबादी देश की कुल संपत्ति का करीब 40 फीसदी हिस्सा अपने पास रखती है. इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि आम नागरिक की संपत्ति और आय सीमित बनी हुई है.

रिपोर्ट पर एक नजर
वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026 को अर्थशास्त्री लुकास चैंसेल, रिकार्डो गोमेज कारेरा, रोवाइदा मोश्रिफ और थॉमस पिकेट्टी ने तैयार किया है. यह रिपोर्ट तीसरी बार जारी की गई है; इससे पहले 2018 और 2022 में भी इसे प्रकाशित किया गया था. रिपोर्ट तैयार करने के लिए दुनिया भर के 200 से ज्यादा शोधकर्ताओं द्वारा जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल किया गया है.

विशेष रूप से, रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में केवल 1 प्रतिशत लोगों के पास देश की 40 फीसदी संपत्ति है. अर्थशास्त्री जयति घोष और जोसेफ स्टिग्लिट्ज के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय लगभग 6,200 यूरो (PPP) और औसत संपत्ति लगभग 28,000 यूरो (PPP) है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि आम नागरिक आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं.

जेंडर असमानता भी चिंता का कारण
रिपोर्ट में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी केवल 15.7 फीसदी बताई गई है और पिछले 10 वर्षों में इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है. यह दर्शाता है कि भारत में आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर असमानता गहरी बनी हुई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह असमानता इसी तरह बढ़ती रही, तो सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. आम नागरिकों की आय बढ़ाने और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है.

संक्षेप में, वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026 यह स्पष्ट करती है कि भारत में अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ रही है, संपत्ति का असमान वितरण जारी है और जेंडर असमानता भी चुनौती बनी हुई है.

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