रांची: राज्य में गुरुजी क्रेडिट कार्ड को लेकर लंबित शिकायत को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने गंभीरता से लिया. उन्होंने गुरुजी क्रेडिट कार्ड में लंबित आवेदनों को एक पखवाड़े के अंदर निष्पादित करने का निर्देश दिया है. सोमवार को झारखंड मंत्रालय में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 94वीं त्रैमासिक बैठक में यह निर्देश बैंकों को दिया. इस बैठक में समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि गुरुजी क्रेडिट कार्ड के लिए कुल 5872 आवेदन विभिन्न बैंकों में दिए गए थे. जिसके विरुद्ध 868 आवेदन अभी भी लंबित पड़े हुए हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि गुरुजी क्रेडिट कार्ड हेमंत सोरेन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इसलिए इसका निष्पादन तीव्र गति से किया जाए. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की इस त्रैमासिक बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अलावे कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, वित्त विभाग के अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, राज्य के सभी अग्रणी बैंक और राज्य के 24 जिलों के अग्रणी जिला प्रबंधक भी मौजूद थे.
सभी बैंकों में 31 दिसंबर 2025 तक कुल जमा राशि 3,87,390 करोड़
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की त्रैमासिक बैठक में समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि झारखंड के बैंकों में 31 दिसंबर 2025 तक कुल जमा राशि 3 लाख 87 हजार 390 करोड़ थी. वहीं ऋण अग्रिम 1 लाख 89 हजार 972 करोड़, ऋण जमा अनुपात 53.63 प्रतिशत और राष्ट्रीय ऋण जमा अनुपात 78 प्रतिशत था. इस मौके पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड राज्य के आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में ऋण जमा अनुपात में निरंतर सुधार वित्तीय प्रणाली पर जनता का भरोसा परिलक्षित करता है. यह सुनिश्चित करना होगा कि यह प्रगति समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. मंत्री ने बताया कि पिछले तिमाही ऋण जमा अनुपात (CD Ratio) 52.28 प्रतिशत से बढ़कर 53.63 प्रतिशत हुआ है जो धीमा है, लेकिन सकारात्मक संकेत है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता समावेशी वित्तीय विकास को सुदृढ़ करना है. जिसके अंतर्गत बैंक द्वारा ग्रामीण वंचित तबकों, लघु उद्यमियों, कृषकों और स्वरोजगार से जुड़े युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि CD Ratio में धीमी सुधार दर्ज की गई. लेकिन हमारे 24 जिलों में से 6 जिलों का औसत 40 प्रतिशत से कम है, जो एक चिंता का विषय है. इस क्षेत्र में संबंधित LDMs को कार्य योजना के तहत कार्य करने का निर्देश दिया. उन्होंने देवघर, पूर्वी सिंहभूम और रांची में तीसरी तिमाही (सितंबर 2025) की होने वाली DCC/DLRC की बैठक ससमय आहूत नहीं होने पर नाराजगी जताई.
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बैंकों की भूमिका पर जताई नाराजगी
बैठक को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कृषि प्रक्षेत्र में विभिन्न बैंकों की भूमिका पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में कृषि प्रक्षेत्रों में 35,822 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. जिसके विरुद्ध मात्र 11,856 करोड़ रुपये ऋण अग्रिम निर्गत किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का मात्र 33.18 प्रतिशत है. कृषि मंत्री ने कहा कि झारखंड कृषि प्रधान राज्य है. बैंकों द्वारा कृषि प्रक्षेत्र में सार्थक भूमिका के निर्वहन से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
वित्त मंत्री ने बैंकों को दिए सुझाव
इस मौके पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैंकों को सुझाव भी दिए. उन्होंने राज्य के बैंकर्स को झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों और प्रमुख महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को व्यवसाय के लिए ऋण उपलब्ध कराने की ओर आकर्षित करने के लिए कैंप लगाने का सुझाव दिया. इसी तरह का कैंप राज्य के प्रमुख महिला महाविद्यालयों में भी आयोजित करने को कहा.
मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिया जोर
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शीघ्र ही वित्त, शिक्षा, कृषि, ग्रामीण विकास विभाग के सचिवों का राज्य के बैंकर्स के साथ समन्वय समिति बनाए जाने की आवश्यकता है. राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसके लिए पशुपालन, दुध उत्पादन, मछली उत्पादन, तालाब, चेकडैम निर्माण आदि प्रक्षेत्रों में विकास के लिए बैंकों के द्वारा सार्थक कार्य योजना तैयार किया जाए.


