Friday, April 4, 2025

राज्यसभा ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर लगाई मुहर, शाह बोले- शांति बनाए रखने का कर रहे प्रयास

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शाह ने कहा कि हिंसा से अभी तक 260 लोगों की मौत हुई है. हम लोग बातचीत के जरिए समाधान निकाल रहे हैं.

नई दिल्ली: राज्यसभा ने शुक्रवार तड़के एक वैधानिक प्रस्ताव पारित कर संघर्षग्रस्त मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की पुष्टि की है, जिसमें विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस निर्णय का समर्थन भी किया. हालांकि विपक्षी सदस्यों ने राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने और हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहने के लिए केंद्र की आलोचना की, लेकिन सरकार ने कहा कि वह राज्य में सामान्य स्थिति लाने के लिए सभी प्रयास कर रही है. सरकार ने जोर देकर कहा कि उसकी नीति राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की नहीं है.

शाह ने सदन में दिया बयान
प्रस्ताव पर चर्चा के अंत में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के दोनों समुदायों के बीच जल्द ही राष्ट्रीय राजधानी में बैठक होने की संभावना जताई. शाह ने सदन को बताया कि सत्र के दौरान मणिपुर में समुदायों के बीच दो बैठकें पहले ही हो चुकी हैं. उन्होंने आगे कहा कि हम मणिपुर में शांति वापस लाने के लिए अपने प्रयास कर रहे हैं. तेरह बैठकें हो चुकी हैं. हमने इस विषय को देर से उठाया क्योंकि बैठकें चल रही थीं. अगली बैठक होने वाली है और इस मुद्दे का जल्द ही समाधान निकलेगा. शाह ने कहा कि बातचीत का रास्ता खुला है. हम इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करते. उन्होंने कांग्रेस और अन्य पार्टियों पर गलत सूचना फैलाने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया.

सीएम ने खुद दिया था इस्तीफा
गृह मंत्री ने दावा किया कि 11 फरवरी को मणिपुर के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था और जैसे ही यह खबर आई, वैसे ही कांग्रेस उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गई, जबकि उसके पास संख्याबल नहीं था. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद पांच विधायकों वाली कांग्रेस सहित किसी अन्य पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर कतई राजनीति ना करें. शाह ने कहा कि हिंसा से अभी तक 260 लोगों की मौत हुई है, मगर 70 प्रतिशत लोग पहले 15 दिन में ही मारे गए थे. उन्होंने कहा कि राज्य में अभी तक 11 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है. हमारी सरकार ने केवल एक ही बार लगाया है.

शाह ने हिंसा का ‘राजनीतिकरण’ करने के लिए विपक्ष पर भी हमला किया और कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान राज्य में इसी तरह की घटनाएं हुईं. उन्होंने कहा कि सात साल पहले मणिपुर में 225 दिनों का कर्फ्यू लगाया गया था. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दिनों में भी किसी प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा नहीं किया था.

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