Sunday, March 29, 2026

राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित उनके आवास के बाहर श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ सुबह से ही जुट रही है.

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रांची: झारखंड के जननायक, दिशोम गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन से पूरा राज्य शोक में डूब गया है. राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित उनके आवास के बाहर सोमवार रात से ही श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. लोगों की भावनाएं उमड़ पड़ीं और रात भर लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए डटे रहे. वही अहले सुबह से ही लोगों का जुटान एक बार फिर से शुरू हो गया है.

इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी गुरुजी के निवास पहुंचे. उन्होंने मौन खड़े होकर गुरुजी को श्रद्धांजलि दी और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी गुरुजी के अंतिम दर्शन को पहुंचे. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि गुरुजी केवल झारखंड नहीं, पूरे देश के लिए आदिवासी समाज के एक महान नायक थे. राष्ट्रपति को चाहिए कि वे उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा करें. ऐसे नेता इतिहास में विरले होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि हमारे अभिभावक नहीं रहे. अब यह जिम्मेदारी हेमंत सोरेन पर है कि वह गुरुजी की विरासत को आगे ले जाएं. हमें उन पर भरोसा है.

इस मौके पर कई प्रमुख नेता भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. तृणमूल कांग्रेस की ओर से पार्टी की वरिष्ठ नेता सह लोकसभा सांसद शताब्दी राय और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन मोरहाबादी पहुंचे. उन्होंने मीडिया के साथ बात करते हुए कहा कि शिबू सोरेन का नाम इतिहास बन गया है. वो जनजातीय समाज के अग्रणी नेता रहे हैं.

इसके अलावा पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव भी श्रद्धांजलि देने रांची पहुंचे. पप्पू यादव ने भावुक स्वर में कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ झारखंड ही नहीं, देश की राजनीति के लिए एक मूल्यवान धरोहर थे. उन्होंने बिहार के कई बड़े नेताओं से टकराकर झारखंड को अलग राज्य बनाने का सपना साकार किया. उनके जैसा साहसी नेता अब मिलना कठिन है. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हेमंत सोरेन जैसे पुत्र को जन्म दिया, जिन्होंने झारखंड को दिशा देने की जिम्मेदारी संभाली है. यह विरासत अब उनके हाथों में है.

मोरहाबादी में सिर्फ राजनीतिक हस्तियां ही नहीं, विभिन्न धर्म समुदायों के लोग भी गुरुजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे. क्रिश्चियन धर्मगुरुओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी गुरुजी के पार्थिव शरीर के पास पहुंचकर मौन प्रार्थना की और पुष्प अर्पित किए. यह दृश्य झारखंड की सामाजिक एकता और गुरुजी के सर्वधर्म समभाव के आदर्श को दर्शाता है.

मोरहाबादी मैदान और आवास क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं. लेकिन आम लोग बेहद संयम और शांति के साथ गुरुजी को अंतिम विदाई दे रहे हैं. श्रद्धा, सादगी और सम्मान, का पल देखा जा रहा है. मोरहाबादी स्थित आवास से गुरुजी का पार्थिव शरीर विधानसभा ले जाया जाएगा, जहां विधायकों और मंत्रियों द्वारा श्रद्धांजलि दी जाएगी. इसके बाद उनके पैतृक गांव निमरा ले जाकर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. राज्य भर में सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और गांव-गांव में श्रद्धांजलि सभाएं हो रही हैं. मोरहाबादी आज झारखंड के इतिहास का एक भावुक अध्याय बन चुका है.

गुरुजी को श्रद्धांजलि के लिए झुके कई सिर

मोरहाबादी का वह इलाका है, जो आमतौर पर सुबह के समय मॉर्निंग वॉक करने वालों से गुलजार रहता है. मंगलवार सुबह एक गहरे शोक का दृश्य बन गया. हजारों की संख्या में लोग मैदान के चारों ओर जमा हो गए. यहां मॉर्निंग वॉक पर आने वाले लोगों की दिनचर्या भी बदल गई, जो लोग नियमित रूप से यहां दौड़ने-टहलने आते हैं, वे आज सिर झुकाए खामोशी से गुरुजी को श्रद्धांजलि दे रहे थे और एक-एक कर उनके आवास पहुंच उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे थे.

अंतिम बार देखने पहुंच रहे लोग

गुरुजी के आवास का दरवाजा आम जनता के लिए पूरी रात खुला रहा. रात से लेकर सुबह तक हजारों की संख्या में लोग वहां पहुंचे और शांतिपूर्वक अंतिम दर्शन किए. किसी ने फूल चढ़ाए, किसी ने मौन प्रार्थना की तो किसी की आंखें नम थीं. समर्थकों के अलावा बड़ी संख्या में आम नागरिक भी उन्हें अंतिम बार देखने पहुंचे.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मोरहाबादी मैदान के एक कोने से लेकर मुख्य मार्ग तक हर जगह लोगों की भीड़ दिखाई दी. महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और स्कूली बच्चों तक, हर वर्ग के लोग, गुरुजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे. स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन श्रद्धांजलि देने वालों की शांति और अनुशासन देखते ही बन रहा है.

गुरु जी के निधन पर राजकीय शोक घोषित
कुछ ही देर में उनका पार्थिव शरीर मोरहाबादी से झारखंड विधानसभा ले जाया जाएगा. वहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्री, विधायक और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उन्हें श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव निमरा ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. राजधानी के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने पोस्टर, बैनर और कैंडल मार्च के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है. स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और दुकानों में भी शोक की भावना दिखी. राज्य सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. गुरुजी के निधन से केवल एक राजनीतिक युग का अंत नहीं हुआ, बल्कि झारखंड की आत्मा के एक अभिभावक को खो देने जैसा महसूस कर रहा है.

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