Tuesday, March 17, 2026

रांची में आइसा की ओर से आक्रोश मार्च निकाला गया, छात्रों ने यूजीसी रेगुलेशन को देशभर में लागू करने की मांग की.

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रांची:राजधानी रांची स्थित धरना स्थल पर ‘यूजीसी रेगुलेशन’ को देशभर में लागू करने की मांग को लेकर वाम दलों के विभिन्न छात्र संगठनों ने रांची में प्रदर्शन किया. जिसमें जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष के. नीतीश, जेएनयू के छात्र नेता मणिकांत सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र शामिल रहे.

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आइसा के छात्र नेताओं ने कहा कि यूजीसी के नियमों को लेकर देशभर में एक समान व्यवस्था नहीं होने से छात्रों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी से जुड़े मामले की सुनवाई होने वाली है. हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट पूरे देश के लिए एक समान नियम लागू करने का आदेश दे, ताकि पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव न हो.

रांची यूनिवर्सिटी से लोकभवन तक आक्रोश मार्च

इस दौरान छात्रों ने रांची विश्वविद्यालय से लोकभवन तक मार्च निकाला. लोकभवन के समीप मार्च सभा में तब्दील हो गई. इस मौके पर जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष के. नीतीश ने केंद्र और शिक्षा संस्थानों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी के लिए समान होना चाहिए, लेकिन आज भी कई संस्थानों में असमानता और भेदभाव देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को पूरे देश में सख्ती से लागू करना जरूरी है, ताकि पिछड़े वर्ग के छात्रों को बराबरी का अवसर मिल सके.

वहीं इस मौके पर छात्र नेता मणिकांत ने भी पिछड़े वर्ग के छात्रों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में आज भी जातिवाद की समस्या खत्म नहीं हुई है. एससी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को मानसिक दबाव झेलना पड़ता है, जो उनके भविष्य के लिए खतरनाक है. इस व्यवस्था को बदलना बेहद जरूरी है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. उनका आरोप है कि कई शिक्षण संस्थानों में भेदभावपूर्ण माहौल के कारण छात्रों का आत्मविश्वास गिरता है और वे खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं. छात्रों ने यह भी बताया कि ऐसे माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है.

AISA protest march in Ranchi

उग्र आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी यूजीसी रेगुलेशन को लागू नहीं किया गया तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इसे देशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा.

यह आंदोलन इस बात का संकेत है कि अब पिछड़े वर्ग के छात्र अब अपने अधिकारों और समान शिक्षा व्यवस्था को लेकर ज्यादा मुखर हो रहे हैं और किसी भी तरह के भेदभाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं.

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