रांची: ब्राउन शुगर, कोकीन, चरस और गांजा जैसे मादक पदार्थों का बाजार पुलिस के लगातार प्रहार के बाद भी फल-फूल रहा है. इसी बीच एक नई मुसीबत भी पुलिस के सामने है, वो मुसीबत है झारखंड में बनने वाले लोकल नशीले पदार्थ. अब ब्राउन शुगर का पाउडर और स्टोन झारखंड में ही बनाए जा रहे हैं, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.
लोकल ड्रग्स हुआ खतरनाक
राजधानी में चतरा में बने ब्राउन शुगर के स्टोन और पाउडर मिलने के बाद रांची पुलिस हैरान है. इसी हफ्ते लगभग 400 ग्राम ब्राउन शुगर रांची पुलिस द्वारा पकड़ा गया है. 400 ग्राम ब्राउन शुगर स्टोन और पाउडर के रूप में कुल 2800 पुड़िया बरामद किया गया था. मामले में कार्रवाई करते हुए रांची पुलिस ने बेहद शातिराना अंदाज में ड्रग्स खरीद-बिक्री करने वाले एक बड़े सिंडिकेट के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया था. जब पुलिस ने गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ शुरू की तो बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

गिरफ्तार ड्रग्स तस्करों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने झारखंड के चतरा जिले में तैयार किए जाने वाले ब्राउन शुगर और स्टोन को रांची में बेचने के लिए लाया था. तस्करों का इशारा साफ था कि अब चतरा में भी ब्राउन शुगर बनाया जा रहा है. पूछताछ में यह भी जानकारी मिली है कि झारखंड में बन रहे ब्राउन शुगर सस्ता होता है और उसका नशा भी बेहतर होता है.
दो तरह के मादक पदार्थ
झारखंड के नशे की तस्कर झारखंड में उगने वाली अफीम का फायदा उठा रहे हैं. यह सभी जानते हैं कि ब्राउन शुगर से लेकर कई तरह के नशे के सामान अफीम के द्वारा ही बनाया जाता है. झारखंड में उपजाई जाने वाली अफीम से ब्राउन शुगर का पाउडर और स्टोन दोनों ही तैयार किया जा रहा है. जानकार बताते हैं कि ब्राउन शुगर के पाउडर का प्रयोग कई तरह से किया जाता है. वहीं ब्राउन स्टोन का प्रयोग सिल्वर पेपर के जरिए किया जाता है.
2800 पुड़िया ने पुलिस को चौंकाया
2 अप्रैल 2026 को रांची के सिटी एसपी पारस राणा और उनकी टीम द्वारा रांची के विधानसभा थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई. जहां से दो ड्रग्स तस्कर अरविंद कुमार और हरीश उरांव को गिरफ्तार किया गया था. दोनों की गिरफ्तारी के बाद छापेमारी में 2800 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद किया गया था. इतने बड़े पैमाने पर ब्राउन शुगर की बरामदगी ने पुलिस के कान खड़े कर दिए. यह पहली बार था जब दोनों तस्करों ने यह स्वीकार किया था कि उन्होंने ब्राउन शुगर की खेप राज्य के बाहर से नहीं बल्कि झारखंड के चतरा से लाया था.
शातिराना अंदाज, महंगे वाहनों से तस्करी
ब्राउन शुगर की खेप के साथ गिरफ्तार तस्करों ने यह भी खुलासा किया कि अब बेहद शातिराना अंदाज में ड्रग्स की तस्करी की जा रही है. तस्करी और नशे की खेप को छुपाने के लिए थार जैसे महंगे वाहनों का प्रयोग किया जा रहा है. महंगे वाहनों में पुड़िया बनाकर ब्राउन शुगर को छुपाकर रखा जाता है, ताकि पुलिस घर में रेड भी करे तो उनसे नशे की खेप बरामद न हो पाए. वहीं धंधे की सुरक्षा के लिए ड्रग्स तस्करों ने हथियार भी रखे थे.
250 एक पुड़िया की कीमत, 100 से ज्यादा की बिक्री
ड्रग्स तस्करों ने यह भी खुलासा किया है कि एजेंटों को पुड़िया बेचने के एवज में कमीशन मिलता था. अगर वे एक दिन में 100 पुड़िया बेच देते तो उन्हें दिन का 900 रुपये कमीशन मिलता था.
पहले से बिहार का सासाराम है बदनाम
राजधानी रांची में पिछले दो सालों के दौरान 100 से अधिक तस्कर गिरफ्तार कर जेल भेजे गए. जब भी ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी हुई, उनका लिंक कहीं न कहीं बिहार के सासाराम या फिर दिल्ली और पंजाब से जुड़ता था. बिहार के सासाराम की भाभी, जिसकी गिरफ्तारी रांची पुलिस द्वारा की जा चुकी है, वह इसके लिए कुख्यात थी. लेकिन अब पुलिस के लिए परेशानी का सबब झारखंड में बनने वाले लोकल मादक पदार्थ हैं.
पुलिस एक्शन में, चतरा में भी दबिश की तैयारी
मामले को लेकर रांची पुलिस भी अब बड़ी कार्रवाई करने में जुट गई है. 400 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद करने और ड्रग्स सिंडिकेट के दो सदस्यों को गिरफ्तार करने के बाद अब इस पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. रांची के सिटी एसपी पारस राणा, जो हाल के दिनों में ड्रग्स तस्करों के लिए काल बने हुए हैं, इस कार्रवाई को विस्तृत करने की बात कह चुके हैं. पारस राणा ने बताया कि ड्रग्स तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई शुरू की गई है. वे चतरा पुलिस के भी संपर्क में हैं.


