रांची के सभी 53 वार्डों में फुटपाथों पर अवैध कब्जा हो गया है, जिससे पैदल चलने वाले लोग जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। दुकानें, होटल और ठेले फुटपाथों को घेर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम के अभियान अस्थायी साबित होते हैं। स्थानीय लोग और विशेषज्ञ स्थायी समाधान, निरंतर निगरानी और अतिक्रमणकारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं ताकि नागरिकों को सुरक्षित मार्ग मिल सके।
रांची। शहर के सभी 53 वार्डों में आम लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए फुटपाथ आज अतिक्रमण की चपेट में हैं। पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इन फुटपाथों पर अब जगह-जगह अस्थायी और स्थायी कब्जा हो चुका है।
परिणामस्वरूप लोगों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। शहर के विभिन्न इलाकों में फुटपाथों पर दुकानों, होटलों, ठेलों और सब्जी विक्रेताओं ने कब्जा जमा लिया है।
कई स्थानों पर तो स्थायी निर्माण कर लिया गया है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के बीच अक्सर टकराव
सड़क पर चलने के दौरान वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के बीच अक्सर टकराव की स्थिति बनती है। कई बार लोग वाहनों की चपेट में आकर घायल भी हो चुके हैं। नगर निगम की ओर से समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है।
अभियान के दौरान फुटपाथों को खाली भी कराया जाता है, लेकिन नियमित निगरानी और सख्ती के अभाव में कुछ ही दिनों में फिर से कब्जा हो जाता है।
फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक लगातार मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। शहर में जल्द ही नगर निगम चुनाव होने वाले हैं। नए पार्षदों के चयन के साथ ही लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

नागरिकों का मानना है कि नए जनप्रतिनिधियों को फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता में रखना चाहिए। इसके लिए सिर्फ अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस रणनीति बनानी होगी।
फुटपाथों पर व्यापार करने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
इसके साथ साथ फुटपाथों पर व्यापार करने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी आजीविका भी प्रभावित न हो और पैदल चलने वालों को भी सुरक्षित मार्ग मिल सके। शहर के सुव्यवस्थित विकास और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए फुटपाथों को खाली कराना जरूरी हो गया है।
अब देखना यह है कि आने वाले नए पार्षद इस चुनौती से किस तरह निपटते हैं और शहरवासियों को सुरक्षित व व्यवस्थित फुटपाथ उपलब्ध करा पाते हैं या नहीं। ्
मेन रोड में बनते ही फुटपाथ पर बढ़ रहा कब्जा
मेन रोड में इन दिनों फुटपाथ का निर्माण कराया जा रहा है ताकि पैदल चलने वाले लोगों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके। लेकिन जिस तेजी से फुटपाथ बन रहा है, उसी तेजी से उस पर कब्जा भी होने लगा है।
कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होते ही दुकानदारों, ठेला संचालकों या अस्थायी ढांचों द्वारा फुटपाथ घेर लिया जा रहा है। इससे पैदल यात्रियों को फिर से सड़क पर उतरकर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

फुटपाथ का उद्देश्य ही यह है कि लोग सुरक्षित रूप से पैदल चल सकें। यदि अभी से फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया, तो कुछ ही दिनों में पूरी तरह से उस पर कब्जा हो जाएगा और निर्माण का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो जनता के टैक्स के पैसे से बना फुटपाथ फिर से आम लोगों के लिए बेकार साबित होगा। इसलिए निर्माण के साथ-साथ अतिक्रमण रोकने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि लोगों को वास्तविक सुविधा मिल सके।
एक्सपर्ट व्यू: रिटायर्ड आईएएस राजीव कुमार
सेवानिवृत्त आईएएस राजीव कुमार का स्पष्ट मत है कि शहरों में फुटपाथ को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन आज अधिकांश स्थानों पर इन पर दुकानों, ठेलों, अवैध पार्किंग या अन्य प्रकार के कब्जे देखे जाते हैं।
इससे आम नागरिकों को मजबूर होकर सड़क पर चलना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। सड़क पर तेज गति से चलने वाले वाहनों के बीच पैदल चलना दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ा देता है।
ठोस और निरंतर कदम उठाने चाहिए
राजीव कुमार के अनुसार नगर निगम को इस दिशा में ठोस और निरंतर कदम उठाने चाहिए। वे सुझाव देते हैं कि नगर निगम के अंतर्गत एक विशेष टीम का गठन किया जाए, जिसका एकमात्र दायित्व फुटपाथों की निगरानी और संरक्षण हो। यदि कोई व्यक्ति या व्यापारी फुटपाथ पर कब्जा करता है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।
केवल औपचारिक या दिखावटी अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यक है कि कार्रवाई नियमित, निष्पक्ष और प्रभावी हो, ताकि अतिक्रमण करने वालों में स्पष्ट संदेश जाए कि फुटपाथ पर कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

वे यह भी रेखांकित करते हैं कि फुटपाथों का निर्माण जनता के टैक्स के पैसे से होता है। जब नागरिक अपने परिश्रम की कमाई से कर अदा करते हैं, तो उनका अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक बुनियादी ढांचा मिले। लेकिन जब फुटपाथ अतिक्रमण से घिर जाते हैं, तो लोगों को सुविधा के बजाय असुविधा का सामना करना पड़ता है।
बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है। राजीव कुमार का मानना है कि यदि फुटपाथ वास्तव में मुक्त और सुगम रहेंगे, तो पैदल यात्री सड़क पर नहीं उतरेंगे और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
यह केवल सौंदर्यीकरण का नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों का प्रश्न है। नगर प्रशासन को गंभीरता, निरंतरता और जवाबदेही के साथ इस दिशा में कार्य करना चाहिए, तभी शहरों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।


