रांची: देश के सर्वश्रेष्ठ 10 सदर अस्पतालों में से एक रांची सदर अस्पताल अपनी उपलब्धियों की सूची में में और बेहद महत्वपूर्ण विशिष्ट सेवा जोड़ने जा रहा है. सदर अस्पताल में रेटिना हेमरेज के इलाज की सुविधा शीघ्र शुरू होने वाली है. निजी अस्पतालों-नेत्र क्लिनिक में बेहद महंगी इंट्राविट्रियल इंजेक्शन (Intravitreal Injection) की सुविधा बहुत कम दर पर उपलब्ध होगी.
मधुमेह, उच्च रक्तचाप की वजह से “रेटिना हेमरेज” के मामले बढ़े
मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किसी अन्य कारणों से आंखों को नुकसान पहुंचता है. ऐसी स्थिति में आंख की रेटिना में सूजन या हेमरेज होना आम है. इस स्थिति में नेत्र चिकित्सक इंट्राविट्रियल इंजेक्शन (Intravitreal Injection) से आंखों की रोशनी को बचाने की कोशिश करते हैं. आम जनता के लिए परेशानी का सबब यह होता है कि यह इलाज काफी खर्चीला होता है.
अभी रांची के निजी नेत्र अस्पताल या क्लिनिक में “इंट्राविट्रियल इंजेक्शन पैकेज” के लिए 40 हजार से एक लाख रुपये चार्ज करते हैं. अब सदर अस्पताल इस व्यवस्था में लगा है कि सदर अस्पताल में नेत्र रोग रेटिना हेमरेज का इलाज “इंट्राविट्रियल इंजेक्शन” का पूरा पैकेज महज 05-06 हजार में उपलब्ध हो जाए.
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कोशिश होगी कि “आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना” के तहत लाभुकों को यह सेवा निशुल्क मिले. साथ ही सामान्य लोगों को भी बेहद मामूली दर (5-6 हजार) रुपये में पूरा पैकेज मिल जाए.
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने कहा कि उनकी कोशिश यह भी है कि निकट भविष्य में सदर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में कॉर्निया ट्रांसप्लांट एवं रेटिना से संबंधित अन्य सर्जरी जैसी सुविधा शुरू हो जाए. उन्होंने बताया कि काला मोतिया के इलाज और जांच की सारी सुविधाएं उपलब्ध है और इसे और दुरुस्त किया जाएगा.
रेटिना हेमरेज की स्थिति में बेहद उपयोगी होता है यह इंजेक्शन- डॉ. प्रीतेश
सदर अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉक्टर प्रीतेश बताते हैं कि रेटिना हेमरेज की स्थिति में इंजेक्शन का यह पैकेज काफी उपयोगी होता है. यह इंजेक्शन रेटिना में नई और कमजोर रक्त वाहिकाओं के बनने को रोकता हैं, जिससे हेमरेज का खतरा कम हो जाता है. इसके साथ-साथ यह इंजेक्शन रेटिना में आए सूजन को भी काम करता है जिससे मरीज की दृष्टि में सुधार होता है.
उन्होंने कहा कि चूंकि यह दावा सीधे प्रभावित स्थान पर पहुंचती है इसलिए या खाने वाली दावों या आई ड्रॉप की तुलना में काफी असर चाहिए और इसका दुष्प्रभाव भी कम है. यह काफी महंगा इलाज है ऐसे में अगर सदर अस्पताल में यह सेवा शुरू होगी तो इसका लाभ आम लोगों को मिल सकेगा.


