पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है. संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर (लगभग 18,600 करोड़ रुपये) के कर्ज की तत्काल वापसी की मांग की है. पाकिस्तान ने इस मांग को स्वीकार करते हुए अप्रैल महीने के अंत तक यह भारी-भरकम राशि अबू धाबी को चुकाने का फैसला किया है.
भू-राजनीति और सुरक्षा कारणों से बढ़ी हलचल
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने यह राशि मूल रूप से पाकिस्तान के ‘भुगतान संतुलन’ को सहारा देने के लिए प्रदान की थी. अब तक यूएई इस कर्ज को सालाना आधार पर ‘रोलओवर’ (अवधि बढ़ाना) करता आ रहा था. हालांकि, ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थितियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के मद्देनजर, यूएई ने अपने फंड को तुरंत सुरक्षित करने का निर्णय लिया है. सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर से ही इस राशि को केवल एक-दो महीनों के लिए बढ़ाया जा रहा था, जो अब 17 अप्रैल को समाप्त हो रहा है.
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान पर दबाव
यह 2 अरब डॉलर की राशि ‘सेफ डिपॉजिट’ के तौर पर स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास रखी गई थी, जिस पर पाकिस्तान लगभग 6 प्रतिशत का भारी ब्याज भी चुका रहा था. विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे वह यह भुगतान कर सकता है, लेकिन इतनी बड़ी राशि का अचानक बाहर जाना उसके भंडार पर भारी दबाव डालेगा.
अन्य देशों के कर्ज का गणित
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मित्र देशों से मिलने वाले ‘रोलओवर’ पर टिकी है. चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान को कुल 12 अरब डॉलर के रोलओवर की जरूरत थी, जिसमें शामिल हैं:
- सऊदी अरब: 5 अरब डॉलर
- चीन: 4 अरब डॉलर
- यूएई: 3 अरब डॉलर (जिसमें से 2 अरब डॉलर अब वापस मांगे गए हैं)
भले ही पाकिस्तान इस कर्ज को चुकाने में सक्षम दिखे, लेकिन इस भुगतान के बाद उसकी ‘एक्सटर्नल फाइनेंसिंग’ (बाहरी वित्तपोषण) की जरूरतें बढ़ जाएंगी. बाजार विशेषज्ञों को डर है कि यूएई के इस कड़े रुख के बाद चीन और सऊदी अरब जैसे अन्य कर्जदाता भी अपनी शर्तों को सख्त कर सकते हैं. पाकिस्तान के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से एक और बड़े राहत पैकेज को हासिल करना होगा ताकि वह अपने गिरते विदेशी मुद्रा भंडार को फिर से भर सके.


