फरवरी में बिहार, खासकर पटना में समय से पहले गर्मी का अहसास हो रहा है। पटना का न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो बीते 15 वर्षों में सर्वाधिक है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और वर्षा की कमी इसके मुख्य कारण हैं। तापमान वृद्धि से कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जैसे कीटों का बढ़ना और मिट्टी की नमी कम होना। मौसम विभाग ने आगे भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का पूर्वानुमान जताया है।
पटना। राज्य में फरवरी के मौसम में बदलाव देखा गया है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीते 15 वर्षों के दौरान पटना के न्यूनतम तापमान में वृद्धि हुई है। फरवरी में पटना का न्यूनतम तापमान 12.0-14.0 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के केंद्र प्रमुख व विज्ञानी आशीष कुमार ने कहा कि इस बार मौसम में बदलाव आने के साथ तापमान में वृद्धि के कई कारण हैं। इस बार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का होना, वर्षा की कमी एवं हवा में बदलाव आने के कारण बीते वर्षों की तुलना में तापमान इस बार अधिक बना हुआ है।
तापमान में तेजी से वृद्धि
दिन में तेज धूप और बादलों की कमी के कारण तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे दिन गर्म और रातें सामान्य से थोड़ी अधिक गर्म महसूस हो रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण भी मौसम प्रणाली में बदलाव देखा जा रहा है।
राजधानी पटना के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस का अंतर बना हुआ है। मंगलवार को पटना का न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो बीते 15 वर्षों के दौरान सबसे अधिक रहा।
राजगीर (नालंदा) में सबसे कम न्यूनतम तापमान
वहीं पटना का अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस एवं 29.4 डिग्री सेल्सियस के साथ कैमूर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। 8.5 डिग्री सेल्सियस के साथ राजगीर (नालंदा) में सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने भी फरवरी के मौसम को लेकर पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। न्यूनतम तापमान 16-18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने के आसार है। जबकि, अधिकतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। दिन और रात के तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का अंतर होने से स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण पर भी असर डालता है।
तापमान में वृद्धि होने से नमी में आएगी कमी
कृषि विज्ञानी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव आने के साथ कृषि पर भी असर पड़ता है। इस दौरान रबी की फसलों में गेहूं, चना, मसूर, सरसों आदि के लिए मौसम अनुकूल माना जाता है।
तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट या वृद्धि होने से नुकसान पहुंचता है। तापमान में वृद्धि होने से कीटों का विकास जल्दी होता है जिससे फसलों पर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उच्च तापमान के कारण मिट्टी की नमी कम हो जाती है। जिससे सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है।
हालांकि तापमान में भी विशेष वृद्धि नहीं हुई है। समय-समय पर किसानों को फसलों के बचाव और बेहतर उत्पादन को लेकर सलाह दी जा रही है। मौसम में वर्षा के आसार होते हैं लेकिन इस बार विशेष रूप से इसका प्रभाव नहीं देखा गया। वर्षा लाभप्रद होती है।
फरवरी में पटना का तापमान ( डिग्री सेल्सियस में)
| तिथि | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान |
|---|---|---|
| 10 फरवरी | 25.6 °C | 13.1 °C |
| 9 फरवरी | 25.6 °C | 14.0 °C |
| 8 फरवरी | 25.5 °C | 13.4 °C |
| 7 फरवरी | 25.0 °C | 13.8 °C |
| 6 फरवरी | 23.8 °C | 12.8 °C |
| 5 फरवरी | 24.8 °C | 14.1 °C |
| 4 फरवरी | 24.8 °C | 14.4 °C |
| 3 फरवरी | 26.0 °C | 15.6 °C |
| 2 फरवरी | 23.3 °C | 12.3 °C |
| 1 फरवरी | 21.8 °C | 13.3 °C |
बीते वर्षों में पटना का तापमान(डिग्री सेल्सियस में)
| वर्ष | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) |
|---|---|---|
| 2026 | 25.6 | 13.1 |
| 2025 | 30.4 | 12.5 |
| 2024 | 24.3 | 8.1 |
| 2023 | 33.2 | 10.2 |
| 2022 | 29.7 | 8.4 |
| 2021 | 33.2 | 6.6 |
| 2020 | 29.6 | 7.6 |
| 2019 | 31.4 | 7.8 |
| 2018 | 32.2 | 9.0 |
| 2017 | 34.2 | 8.7 |
| 2016 | 33.3 | 8.2 |
| 2015 | 32.0 | 7.9 |
| 2014 | 28.4 | 7.2 |
| 2013 | 30.0 | 9.3 |
| 2012 | 32.2 | 6.0 |
| 2011 | 37.5 | 9.0 |


