गोड्डा: नेटबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें गोड्डा के खिलाड़ियों का पूरे झारखंड में दबदबा रहा है. कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. इन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं मोनालिसा.
- मोनालिसा गोड्डा के पोरैयाहाट प्रखंड के एक सुदूर गांव की पहाड़िया आदिम जनजाति की लड़की हैं. सरकार ने पहाड़िया जनजाति को पीवीटीजी समूह (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) में रखा है. ऐसे समुदाय से निकलकर मोनालिसा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है.
- मोनालिसा के पिता वैद्यनाथ देवड़ी ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए काफी संघर्ष किया. इसके बाद उन्होंने एक साधारण नौकरी की और फिर पूरे परिवार के साथ गोड्डा शहर में रहने लगे. उनकी सबसे बड़ी बेटी मोनालिसा की शुरू से ही खेलों में रुचि थी, लेकिन खेलों में रुचि और लड़की होना थोड़ा चुनौतीपूर्ण था. लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी मोनालिसा ने अपने पिता के साथ घर से बाहर कदम रखा और फिर क्रिकेट में अपनी किस्मत आजमाई.
- जल्द ही वह जिला स्तरीय टीम का हिस्सा बन गईं. फिर उन्होंने ज़िले की ओर से राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया, लेकिन यहां कई कठिनाइयां थीं. प्रतिस्पर्धा भी बहुत ज़्यादा थी और खेल महंगा भी. क्रिकेट में उन्हें अपने लिए पर्याप्त संभावनाएं नजर नहीं आ रही थीं. उसी दौरान अरुण साह और देवा जी जैसे खेल प्रेमी गोड्डा में नेटबॉल का एक नया खेल लेकर आए. उस समय इस खेल के बारे में बहुत कम लोग जानते थे.
- यह दो दशक पुरानी घटना है. नेटबॉल, बास्केटबॉल जैसा ही एक खेल लगता था. गोड्डा में यह खेल खेला जाने लगा, संघ बने. खिलाड़ी इकट्ठे हुए और जिले से टीमें भेजी गईं. इसी दौरान, एक छोटी बच्ची मोनालिसा, जिसका पहला प्यार क्रिकेट था, गोड्डा के गांधी मैदान में आई. वह रोज नेटबॉल देखने आती थी.
- फिर मोनालिसा को एक आमंत्रण मिला और उन्होंने नेटबॉल खेलना शुरू कर दिया. फिर उन्होंने सीनियर राष्ट्रीय खिलाड़ी गुंजन झा के मार्गदर्शन में नेटबॉल खेलना शुरू किया. इस तरह उन्होंने झारखंड टीम में जगह बनाई. फिर उनका चयन भारतीय टीम के लिए हुआ. लेकिन पहली बार मौका मिलने के बाद भी वीजा न मिलने के कारण वह खेलने नहीं जा सकीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वह पूरे जिले में घूम-घूम कर बच्चों को नेटबॉल के प्रति जागरूक करने लगीं. आज जिले में करीब दो हजार बच्चे नेटबॉल खेलते हैं, जिनमें से 100 बच्चे राष्ट्रीय जूनियर और सब-जूनियर स्तर पर झारखंड के लिए खेल रहे हैं या खेल चुके हैं.
- मोनालिसा को नेटबॉल का इतना शौक है कि वह साल भर बच्चों को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करती हैं. मोनालिसा नेटबॉल की राष्ट्रीय अंपायर भी हैं. उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में गुंजन झा के साथ रेफरी की भूमिका निभाई है. गोड्डा के खिलाड़ियों की टीम ने झारखंड के लिए बालक और बालिका वर्ग में आधा दर्जन पदक जीते हैं.
इतना ही नहीं, कोरोना काल में मोनालिसा का चयन भारतीय टीम के लिए हुआ था, लेकिन बाद में यह दौरा रद्द हो गया. मोनालिसा एक बार फिर राष्ट्रीय कैंप के लिए चुनी गई हैं. उम्मीद है कि वह भारतीय टीम की जर्सी पहनेंगी. उनके प्रयासों का नतीजा है कि अगले साल गोड्डा को सीनियर नेटबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी मिल गई है. मोनालिसा अब टीम के साथ हरियाणा के लिए रवाना हो चुकी हैं.
गोड्डा जिला नेटबॉल संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र महतो गांधी कहते हैं कि गोड्डा के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में मोनालिसा का बड़ा योगदान है. लेकिन सरकार को भी आगे काम करना चाहिए, वर्तमान सरकार ने 30 खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि प्रदान की है. उम्मीद है कि आगे चलकर बच्चे सीनियर स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे, यह प्रयास जरूरी है.


