मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 के तहत बिहार में 11 जिला अस्पतालों और 180 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र बनाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों पर इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुरूप 36 प्रकार के आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार होगा।
पटना। मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 के विजन के तहत प्रथम चरण में राज्य के 11 जिला अस्पतालों और 180 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रसूति शल्य कक्षों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह जानकारी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को दी।
उन्होंने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में 11 जिला अस्पताल जिन्हें विशिष्ट चिकित्सा केंद्र बनाया जाएगा उसमें बेगूसराय, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, सिवान, सीतामढ़ी, वैशाली, अररिया, बांका, मुजफ्फरपुर, नालंदा और सहरसा जिला अस्पताल हैं। सभी जिलों को मिलाकर कुल 180 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी चिह्नित किया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं दी जा सकें।
जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आइपीएचएस) के अनुरूप 36 प्रकार के आधुनिक और हाई-टेक चिकित्सीय उपकरण की उपलब्ध कराए जाएंगे।
सभी सिविल सर्जनों को चिह्नित केंद्रों का निरीक्षण कर आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कमी का आकलन करने के निर्देश दिया गया है। ऐसे केंद्रों पर एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और डिफिब्रिलेटर की उपलब्धता अनिवार्य रूप से की जाएगी, ताकि आपातकालीन स्थिति का बेहतर प्रबंधन हो सके।
इस पहल से न केवल बड़े अस्पतालों पर भार कम होगा, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में एक ऐतिहासिक और दीर्घकालिक सुधार भी देखने को मिलेगा।


