Monday, April 6, 2026

मार्च में भारत की सेवा क्षेत्र वृद्धि 14 महीने के निचले स्तर 57.5 पर आई, हालांकि मजबूत निर्यात और रिकॉर्ड भर्ती जारी रही.

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नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ ‘सेवा क्षेत्र’ की विकास गति में मार्च महीने में गिरावट दर्ज की गई है. सोमवार को जारी एक प्रतिष्ठित मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, नए बिजनेस ऑर्डरों में कमी के कारण सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले 14 महीनों के सबसे निचले स्तर पर आ गई है.

PMI आंकड़ों में गिरावट
मौसमी रूप से समायोजित ‘HSBC इंडिया सर्विसेज़ PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स’ फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर दर्ज किया गया. यह जनवरी 2025 के बाद से व्यावसायिक गतिविधियों और नए ऑर्डरों की सबसे धीमी विस्तार दर है. हालांकि, सूचकांक का 50 से ऊपर रहना अभी भी क्षेत्र में विस्तार को दर्शाता है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार में निरंतर दूसरे महीने कमी देखी गई है.

निर्यात और रोजगार में सकारात्मक रुख
घरेलू सुस्ती के विपरीत, विदेशी ऑर्डरों के मोर्चे पर स्थिति मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका जैसे वैश्विक बाजारों से मिली भारी मांग के कारण नए निर्यात ऑर्डरों में 2024 के मध्य के बाद की सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई है.

इस विदेशी मांग और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के चलते रोजगार सृजन में भी तेजी आई है. कंपनियों का व्यावसायिक विश्वास पिछले 12 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त 2025 के बाद सबसे तेज़ गति से नई भर्तियां की गई हैं.

बढ़ती लागत और महंगाई का दबाव
सर्वेक्षण में इनपुट लागत को लेकर चिंता जताई गई है. कच्चे माल, विशेषकर खाद्य तेल, बिजली, ईंधन और श्रम की कीमतों में वृद्धि के कारण परिचालन लागत जून 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. लागत के इस बोझ को कम करने के लिए कंपनियों ने सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिससे ‘सेलिंग प्राइस इन्फ्लेशन’ 7 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर है.

अर्थशास्त्री का विश्लेषण
HSBC इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा, मार्च में सेवा क्षेत्र का विस्तार जारी रहा, लेकिन इसकी गति धीमी हुई है. हालांकि, मजबूत निर्यात मांग ने सेवा प्रदाताओं के आत्मविश्वास को बनाए रखा है, जिससे वे भविष्य की उत्पादन संभावनाओं को लेकर बेहद आशावादी हैं.

सेवा और विनिर्माण दोनों को मिलाकर बनने वाला ‘कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स’ भी फरवरी के 58.9 से गिरकर मार्च में 57.0 पर आ गया है. यह साढ़े तीन साल में विस्तार की सबसे धीमी दर है. स्पष्ट है कि घरेलू मांग में नरमी और बढ़ती लागत भारतीय निजी क्षेत्र के लिए अल्पकालिक चुनौतियां पेश कर रही हैं.

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