पूर्वी सिंहभूमः जिले के घाटशिला प्रखंड की हैंदलजूड़ी पंचायत में फर्जी तरीके से मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का लाभ लेने का मामला उजागर हुआ है. जांच में पुष्टि होने पर गालूडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी के आदेश पर घाटशिला बीडीओ यूनिका शर्मा ने हैंदलजूड़ी पंचायत के सचिव को मामला दर्ज कराने का निर्देश दिया था. बीडीओ के निर्देश के बाद पंचायत सचिव ने गालूडीह थाना में फर्जी तरीके से मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का लाभ लेने के मामले में बिहार एवं पश्चिम बंगाल की महिलाओं पर नाम पर प्राथमिकी दर्ज कराई है.
पंचायत सचिव मंगल टुडू के आवेदन के आधार पर गालूडीह थाना में कांड संख्या21/2025 भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) 318(4), 338, 339, 336(3)61(2), 3(5)65, 66सी एवं 66डी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. इस मामले के अनुसंधानकर्ता घाटशिला थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर बंश नारायण सिंह को बनाया गया.
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का फर्जी तरीके से लाभ लेने वाली महिलाओं में बिहार राज्य के किशनगंज जिला के ठाकुरगंज थाना अंतर्गत विभिन्न गांव की 40 महिलाओं और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा थाना अंतर्गत उत्तर दिनाजपुर के 132 महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी कर सरकारी राशि का लाभ लेने का मामला दर्ज किया गया है.हालांकि थाना में दिए आवेदन में राशि का उल्लेख नहीं किया गया है. अनुमान लगाया जा रहा फर्जी दस्तावेज के जरिए पश्चिम बंगाल और बिहार की 172 महिलाओं के बैंक खाते में हर माह किस्त की राशि भेजी गई थी.
जबकि हैरानी की बात यह है कि हैंदलजूड़ी पंचायत के आठ गांव में एक खास समुदाय का एक भी परिवार नहीं रहता है. बावजूद पंचायत के छोलगोड़ा गांव की एक समुदाय विशेष की 172 महिलाओं के नाम मंईयां सम्मान योजना में फर्जी तरीका से नामों की स्वीकृत कर सभी लाभुक महिलाओं के बैंक खाते में राशि की किस्त भेज दी गई. जबकि अंकित सूची में राशन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड नंबर अंकित किया गया. सभी नामों में एक ही राशन कार्ड नंबर अंकित है. बावजूद योजना स्वीकृत हो गई. इससे साफ जाहिर है कि मंईयां सम्मान योजना के लिए दिए गए आवेदन का पंचायत और प्रखंड स्तर पर सही तरीके से जांच नहीं की गई.
“शिकायत मिलने के बाद मामले की तहकीकात शुरू कर दी गई है. झारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार की पुलिस और पश्चिम बंगाल की पुलिस से भी इन सभी महिलाओं के संबंध में जानकारी इकट्ठा की जा रही है. जांच में दोषी पाए जाने पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.”-ऋषभ गर्ग, ग्रामीण एसपी, पूर्वी सिंहभूम
इधर, जैसे ही इस मामले की जानकारी स्थानीय महिलाओं को मिली उन्होंने साफ तौर पर कहा कि झारखंड सरकार स्थानीय महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना का लाभ देने में कोई दिलचस्पी नहीं रखती है. उनको सिर्फ अपना वोट बैंक मजबूत करना है. इसलिए खास समुदाय की बाहरी महिलाओं को अवैध रूप से मंईयां सम्मान योजना का लाभ दिया जा रहा है.
स्थानीय महिला रायमुनी टुडू ने बताया कि हम झारखंड के मूल निवासी हैं, लेकिन मुझे अगस्त से दिसंबर तक ही मंईयां सम्मान योजना की राशि मिली. उसके बाद कागजात की जांच का बहाना बनाकर मेरा पैसा रोक दिया गया. हमें बार-बार पंचायत भवन दौड़ाया जा रहा है, लेकिन अभी तक मंईयां सम्मान योजना की राशि नहीं चालू हुई है. इसी तरह बहुत से झारखंडी महिलाएं हैं जिसको अभी तक मंईयां सम्मान योजना की एक भी किस्त नहीं मिली है.
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद अब प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करेगा यह देखने वाली बात है. हालांकि यह भ्रष्टाचार केवल पूर्वी सिंहभूम तक ही सीमित नहीं है. यह पूरे झारखंड में फैला हुआ है. आए दिन कहीं ना कहीं से मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में भ्रष्टाचार की बात सुनने में आ रही है.


