Thursday, February 12, 2026

भारत-US समझौते से अमेरिकी कॉटन वाले भारतीय कपड़ों पर ‘जीरो रेसिप्रोकल ड्यूटी’ मिलेगी, जिससे प्रभावी टैक्स 3% रह जाएगा और निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारतीय वस्त्र एवं परिधान निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अमेरिकी कपास से तैयार किए गए भारतीय परिधानों को ‘जीरो-रेसिप्रोकल ड्यूटी’ का लाभ मिल सकता है.

मार्च में समझौते की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच यह अंतरिम व्यापार समझौता मार्च के आसपास हस्ताक्षरित होने की संभावना है. समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल और परिधान निर्यात पर अमेरिका की ओर से पारस्परिक (रेसिप्रोकल) शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है. हालांकि, जो परिधान अमेरिकी कपास से बनाए जाएंगे, उन पर पारस्परिक शुल्क शून्य रहेगा.

प्रभावी शुल्क घटकर 3% के आसपास
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) शुल्क लागू रहेगा, क्योंकि रियायत केवल पारस्परिक शुल्क हिस्से पर दी जाएगी. ऐसे में अमेरिकी कपास से बने परिधानों पर प्रभावी शुल्क घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह जाएगा. इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी.

बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा की चुनौती
गोयल का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते में अनुकूल शर्तें हासिल की हैं. बांग्लादेश को लगभग 19 प्रतिशत की रियायती पारस्परिक दर और अमेरिकी कपास से बने कुछ रेडीमेड गारमेंट्स पर शून्य शुल्क की सुविधा मिली है.

अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान बांग्लादेश का अमेरिका को रेडीमेड गारमेंट निर्यात लगभग 7.6 अरब डॉलर रहा, जो भारत के 3.26 अरब डॉलर से दोगुना से अधिक है. ऐसे में भारत के लिए यह समझौता निर्यात बढ़ाने में अहम साबित हो सकता है.

किसानों के हित सुरक्षित
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने इस समझौते में 90 से 95 प्रतिशत कृषि उत्पादों को बाहर रखा है, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें. चावल, गेहूं, डेयरी उत्पाद, दालें, खाद्य तेल और कुछ फल-सब्जियों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है.

चयनित उत्पादों पर सीमित रियायत
हालांकि, बादाम, अखरोट, पिस्ता, सेब, क्रैनबेरी और सोयाबीन तेल जैसे उत्पादों पर टैरिफ-रेट कोटा के माध्यम से सीमित रियायत दी गई है.

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है. विशेष रूप से अमेरिकी कपास से बने परिधानों पर कम शुल्क से निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि कृषि क्षेत्र को संरक्षण देने की नीति बरकरार रखी गई है.

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