मुंबई: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी मोर्चे से एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 फरवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.885 अरब डॉलर की शानदार बढ़त के साथ 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इससे पहले मध्य फरवरी में यह आंकड़ा 725.727 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था.
गोल्ड रिजर्व और वैश्विक परिस्थितियां
इस ऐतिहासिक वृद्धि का सबसे बड़ा कारण देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में आया उछाल है. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, गोल्ड रिजर्व 4.141 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है. मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने 2024 से अब तक अपने भंडार में लगभग 75 टन सोना जोड़ा है, जिससे कुल होल्डिंग 880 टन हो गई है. अब भारत के कुल मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत हो चुकी है.
रिजर्व के प्रमुख घटक
विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्सों में भी बदलाव देखा गया
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA): भंडार का यह सबसे बड़ा हिस्सा 573.125 अरब डॉलर पर रहा. इसमें डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य वैश्विक मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव शामिल होता है.
- विशेष आहरण अधिकार (SDR): इसमें 2.6 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे यह 18.866 अरब डॉलर हो गया.
रुपये की स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा कवच
विदेशी मुद्रा भंडार का यह विशाल स्तर भारतीय रिजर्व बैंक को वैश्विक बाजार की अस्थिरता से निपटने के लिए अतिरिक्त ‘फायरपावर’ प्रदान करता है. पर्याप्त भंडार होने से आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को रोकने और मुद्रा की अस्थिरता को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
चालू खाता घाटा और सर्विस एक्सपोर्ट
भले ही वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में व्यापार घाटा बढ़कर 93.6 अरब डॉलर हो गया, लेकिन भारत के सर्विस एक्सपोर्ट और रेमिटेंस (प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया धन) ने संतुलन बनाए रखा. इस तिमाही में आईटी और व्यावसायिक सेवाओं के दम पर शुद्ध सेवा प्राप्तियां बढ़कर 57.5 अरब डॉलर रहीं. वहीं, प्रेषित धन (Remittances) भी पिछले साल के 35.1 अरब डॉलर से बढ़कर 36.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार का यह स्तर भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करता है, जो विदेशी निवेशकों के भरोसे को और बढ़ाएगा.


