Wednesday, February 4, 2026

भारत-अमेरिका समझौते से टैरिफ 25% से घटकर 18% हुआ.

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी व्यापार डील आखिरकार 2 फरवरी को पूरी हो गई. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आपसी टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा. इससे भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत के बाद इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों के मजबूत होते व्यापारिक संबंधों का संकेत बताया और इस फैसले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का आभार जताया.

पहले टैरिफ से प्रभावित हुई थी प्रतिस्पर्धा
27 अगस्त 2025 से लागू किए गए भारी टैरिफ के कारण कुछ उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था. इससे भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई और अमेरिका जैसे बड़े निर्यात बाजार में भारतीय सामानों की मांग पर असर पड़ा. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, ऐसे में ऊंचे टैरिफ ने कई सेक्टरों की कमाई पर दबाव बनाया था.

अब टैरिफ में कटौती के बाद कंपनियों को बेहतर मार्जिन, कीमतों में लचीलापन और नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.

किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, टैरिफ घटने का सबसे ज्यादा फायदा उन सेक्टरों को मिलेगा जिनका अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भरता है. इनमें टेक्सटाइल, सीफूड, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, रत्न और आभूषण तथा कुछ कंज्यूमर एक्सपोर्ट कंपनियां शामिल हैं.

वस्त्र और परिधान उद्योग को सबसे बड़ा लाभ
टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है. अमेरिका भारत के कुल टेक्सटाइल निर्यात का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा है. इसके अलावा, भारत में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में कपास अमेरिका से आती है.

टैरिफ कम होने से अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी, जिससे ऑर्डर बढ़ने की संभावना है. जिन कंपनियों का अमेरिकी बाजार से बड़ा राजस्व आता है, उनमें वॉल्यूम रिकवरी और बेहतर प्राइसिंग की उम्मीद की जा रही है.

केमिकल सेक्टर को मिलेगी मार्जिन में राहत
स्पेशलिटी केमिकल्स और इंटरमीडिएट्स से जुड़ी कंपनियों के लिए भी यह डील अहम है. इस सेक्टर में ज्यादातर एक्सपोर्ट लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स और सख्त नियमों के तहत होते हैं. टैरिफ सीधे नेट रियलाइजेशन को प्रभावित करता है, ऐसे में शुल्क कम होने से कंपनियों की कमाई में सुधार हो सकता है.

इंजीनियरिंग गुड्स के निर्यात को बढ़ावा
इंजीनियरिंग गुड्स अमेरिका को भारत के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं. इसमें औद्योगिक मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कैपिटल गुड्स आते हैं. टैरिफ में कटौती से इन उत्पादों की लैंडेड कॉस्ट घटेगी, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी.

रत्न और आभूषण उद्योग पर सकारात्मक असर
रत्न और आभूषण उद्योग का निर्यात मूल्य के लिहाज से काफी बड़ा है, लेकिन इसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा भी ज्यादा है. टैरिफ कम होने से अमेरिकी थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स के लिए लागत घटेगी. इससे भारतीय निर्यातकों पर मार्जिन का दबाव कम होगा और ऑर्डर बढ़ने की संभावना बनेगी.

कंज्यूमर और आईटी सेक्टर को अप्रत्यक्ष फायदा
कुछ कंज्यूमर गुड्स कंपनियों को अमेरिका से अच्छी कमाई होती है. टैरिफ घटने से इनके उत्पादों की मांग धीरे-धीरे बढ़ सकती है. वहीं, आईटी सेक्टर को इस समझौते से सीधे नहीं, लेकिन बेहतर व्यापारिक माहौल और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के कारण अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की उम्मीद है.

सीफूड सेक्टर में मांग सुधार की उम्मीद
सीफूड निर्यातकों के लिए भी यह डील राहत लेकर आई है. टैरिफ घटने से लैंडिंग कॉस्ट कम होगी, जिससे अमेरिकी बाजार में मांग बढ़ सकती है. इससे कंपनियों की कमाई की स्थिति और भविष्य की दृश्यता बेहतर होने की संभावना है.

बाजार की नजर आगे के असर पर
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेड डील भारत के निर्यात आधारित सेक्टरों के लिए मध्यम से लंबी अवधि में सकारात्मक साबित हो सकती है. आने वाले महीनों में ऑर्डर फ्लो, मार्जिन और राजस्व पर इसका वास्तविक असर देखने को मिलेगा.

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