नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारत ने अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव किया है. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बाद, अब भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर निर्भरता कम करते हुए अमेरिका से सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं का आयात बढ़ाने का निर्णय लिया है.
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत के आयात बास्केट में विविधता लाना है. अमेरिका कीमती धातुओं के व्यापार का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है, जो कच्चे, रिफाइंड और स्क्रैप के रूप में भारी मात्रा में सोने-चांदी का निर्यात करता है. इस रणनीतिक बदलाव से न केवल घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें कम होने की उम्मीद है, बल्कि अमेरिका के साथ भारत के व्यापार अधिशेष को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी.
कृषि और डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
समझौते के तहत, भारत अमेरिका को 2.8 अरब डॉलर का कृषि निर्यात करता है, जबकि वहां से 1.5 अरब डॉलर का आयात होता है. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों को कड़े बायो-सिक्योरिटी मानकों को पूरा करना होगा और जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) खाद्य पदार्थों की अनुमति नहीं दी जाएगी.
यह समझौता भारत के डेटा सेंटर उद्योग के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा. पहले एंटरप्राइज GPU सर्वर पर 20-28% तक आयात शुल्क लगता था, जिसे अब युक्तिसंगत बनाया गया है. इससे GPU-रेडी डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत में लगभग 14% की कमी आएगी, जिससे भारत सिंगापुर जैसे वैश्विक केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेगा.
टैरिफ में भारी कटौती से भारतीय निर्यातकों को लाभ
2024 में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 86.35 अरब डॉलर रहा था. नए समझौते के तहत, 30.94 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर प्रभावी शुल्क को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है. इसके अलावा, 10.03 अरब डॉलर के अन्य उत्पादों पर शुल्क को शून्य कर दिया गया है.
शुल्क दरों में इस कटौती से भारत के कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी क्षेत्र के उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी. यह समझौता न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय एमएसएमई (MSMEs) और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए तकनीक और निवेश के नए रास्ते भी खोलेगा.


