Saturday, February 28, 2026

भारत अपनी भाषाई विविधता और सुरक्षा के लिए मिडलवेट एआई मॉडल और वैश्विक साझेदारियों के जरिए डिजिटल संप्रभुता और आत्मनिर्भरता हासिल कर रहा है.

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नई दिल्ली: आज के दौर में अगर डेटा ‘नया तेल’ है, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वह इंजन है जो भविष्य की अर्थव्यवस्था को चलाएगा. भारत ने अब यह तय कर लिया है कि वह इस इंजन की चाबी किसी विदेशी कंपनी के हाथ में नहीं रहने देगा. दिल्ली में हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में भारत के नीति निर्माताओं और टेक दिग्गजों ने अपनी इस मंशा को साफ कर दिया है. इसे नाम दिया गया है— ‘सॉवरेन एआई’

‘सॉवरेन एआई’ क्या है और यह क्यों जरूरी है?
सरल शब्दों में, सॉवरेन एआई का मतलब है ऐसी तकनीक जिस पर भारत का नियंत्रण हो. मौजूदा AI, जैसे ChatGPT या Google Gemini, के सर्वर विदेशों में हैं. उनके एल्गोरिदम भी विदेशी डेटा पर आधारित हैं. भारत चाहता है कि उसके पास ऐसे मॉडल हों जो हिंदी, तमिल, बंगाली जैसी स्थानीय भाषाओं को समझें और डेटा भारत के डेटा सेंटरों में सुरक्षित रहे.

सैम ऑल्टमैन का बयान: भारत ‘कंज्यूमर से बिल्डर’ बन रहा है
ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा कि भारत की ऊर्जा ‘बेमिसाल’ है. पहले भारत को एक बड़े बाज़ार के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब भारत ‘बिल्डर’ बन गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि AI बनाना सस्ता नहीं है. दुनिया का सबसे ताकतवर AI बनाने के लिए अरबों डॉलर और बहुत बिजली की जरूरत होती है.

भारत ‘मिडिलवेट’ मॉडल पर ध्यान दे रहा है.

  • लाइटवेट मॉडल: फ़ोन या लैपटॉप पर चल सकते हैं.
  • मिडिलवेट मॉडल: 30 से 105 बिलियन पैरामीटर वाले. ये मॉडल ChatGPT जितने विशाल नहीं होते, लेकिन ज़्यादातर काम को सस्ते और सटीक तरीके से कर सकते हैं.

Sarvam AI ने 30-बिलियन और 105-बिलियन पैरामीटर वाले मॉडल पेश किए हैं, जो भारतीय ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.

भारत की AI रणनीति तीन मुख्य बातों पर आधारित है:

  • स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार ‘जीपीयू’ खरीद रही है और स्टार्टअप्स को सस्ती दर पर उपलब्ध करा रही है.
  • भारतीय मॉडल: Krutrim और Sarvam जैसे स्टार्टअप भारतीय भाषाओं और संस्कृति को समझने वाले AI बना रहे हैं.
  • ग्लोबल पार्टनरशिप: NVIDIA और Microsoft जैसी कंपनियों के साथ भारत डेटा सेंटर बना रहा है.

आम आदमी को क्या फ़ायदा होगा?
सॉवरेन एआई से किसान अपनी भाषा में खेती की सलाह ले सकते हैं. सरकारी योजनाएँ सीधे लोगों तक पहुँचेंगी. स्वास्थ्य सेवाओं में AI से बीमारियों की जाँच सस्ती और तेज़ होगी.

चुनौतियां अभी भी हैं
AI के लिए ज़्यादा बिजली और पानी (कूलिंग के लिए) की ज़रूरत होती है. दुनिया के बेहतरीन चिप्स अभी भी विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. भारत के लिए असली परीक्षा इन संसाधनों को जुटाना होगा. भारत की AI यात्रा अब शुरू हो चुकी है. भारत दुनिया के सबसे ‘कामयाब और किफायती’ AI मॉडल बनाने पर काम कर रहा है. भारत का लक्ष्य है – तकनीक अपनी हो, डेटा अपना हो और तरक्की भी अपनी हो.

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