Tuesday, January 27, 2026

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को वैश्विक तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और मिश्रित तिमाही नतीजों के चलते भारी गिरावट के साथ बंद हुआ.

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 एशियाई बाजारों से मिले सुस्त संकेतों और बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच मंगलवार (20 जनवरी) को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आए. कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया. दिन के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए.

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 83,207 अंक पर खुला. हालांकि, खुलते ही बाजार में कमजोरी दिखने लगी और जैसे-जैसे दिन बढ़ा, बिकवाली का दबाव तेज होता गया. दोपहर बाद बाजार में गिरावट और गहराई और अंत में सेंसेक्स 1,065.71 अंक या 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,180.47 अंक पर बंद हुआ.

  • इसी तरह, एनएसई का निफ्टी-50 भी सपाट शुरुआत के बावजूद टिक नहीं पाया. इंडेक्स 25,580 अंक पर खुला, लेकिन कुछ ही देर में 25,500 के नीचे फिसल गया. पूरे दिन बिकवाली हावी रहने के बाद निफ्टी 353 अंक या 1.38 प्रतिशत टूटकर 25,232.50 अंक पर बंद हुआ.

वैश्विक अनिश्चितता से बिगड़ी धारणा
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ते राजनीतिक और व्यापारिक तनावों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है. अमेरिका की ओर से टैरिफ को लेकर लगातार सख्त बयानबाजी और यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते मतभेदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है. इसके चलते निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते नजर आए.

इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार पर भारी पड़ी. मजबूत अमेरिकी श्रम बाजार के चलते यह आशंका बनी हुई है कि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकता है. इससे डॉलर मजबूत हुआ और उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे देशों की मुद्राओं और शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ा.

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
घरेलू मोर्चे पर डॉलर के मुकाबले रुपये में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया. रुपया 91 के स्तर के आसपास फिसल गया, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली और तेज होने की आशंका बढ़ गई. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पहले से ही भारतीय बाजारों में सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.

शेयरों और सेक्टरों में व्यापक गिरावट
सेंसेक्स के ज्यादातर शेयर लाल निशान में बंद हुए. फाइनेंस, ऑटो, मेटल और फार्मा सेक्टर के शेयरों में खासतौर पर ज्यादा दबाव देखने को मिला. केवल चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में सीमित मजबूती रही.

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में रहा. इसके अलावा ऑटो और आईटी शेयरों में भी दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. व्यापक बाजार में गिरावट और गहरी रही, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब तीन फीसदी तक की कमजोरी देखी गई.

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