Saturday, March 14, 2026

भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते 6% टूटा;ऑटो सेक्टर क्रैश हुआ और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर.

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मुंबई: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंका ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है. इस कारोबारी सप्ताह में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स, निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई. शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,470 अंक गिरकर 74,563 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 5.31% की साप्ताहिक गिरावट के साथ 23,151 के स्तर पर आ गया.

गिरावट के प्रमुख कारण और सेक्टोरल प्रभाव
बाजार में इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई आक्रामक निकासी है. भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर महंगाई और राजकोषीय घाटे का डर बढ़ गया है.

सबसे ज्यादा मार ऑटो सेक्टर पर पड़ी है. निफ्टी ऑटो इंडेक्स इस हफ्ते 10-11% तक टूट गया, जो मार्च 2020 के कोरोना संकट के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है. इसके अलावा बैंकिंग और मेटल शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई. एलएनजी और सीएनजी की संभावित कमी ने शहरी बाजारों में ऑटो और विनिर्माण क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

आर्थिक संकेतकों में हलचल
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) 22 के स्तर के पार निकल गया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव का संकेत दे रहा है. अकेले शुक्रवार के सत्र में ही निवेशकों की करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई.

आगे की राह और तकनीकी स्तर
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 23,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट (सहारा) के रूप में देखा जा रहा है. यदि तनाव और बढ़ता है और निफ्टी इस स्तर को तोड़ता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है. ऊपर की ओर 23,300 और 23,500 पर कड़ा प्रतिरोध (Resistance) मौजूद है. बैंक निफ्टी के लिए 53,500 और 53,000 महत्वपूर्ण स्तर बने हुए हैं.

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