मुंबई: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने भारतीय शेयर बाजार में हड़कंप मचा दिया है. गुरुवार, 12 मार्च 2026 को बाजार खुलते ही निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 1.2% से अधिक टूट गए.
बाजार का ताजा हाल: प्रमुख आंकड़े
कारोबार की शुरुआत में BSE सेंसेक्स 972.99 अंक (1.27%) गिरकर 75,890.72 के स्तर पर आ गया. वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 299.45 अंक (1.22%) की गिरावट के साथ 23,567.15 पर फिसल गया. बाजार में इस गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए.
कच्चे तेल में आग और ईरान-अमेरिका तनाव
बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड का $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करना है. एशियाई ट्रेडिंग सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 9.16% का भारी उछाल देखा गया, जिससे यह $101.53 तक पहुंच गया. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने सप्लाई बाधित होने का डर पैदा कर दिया है.
सेक्टोरल इम्पैक्ट: ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावित
बढ़ती तेल कीमतों का सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ा है जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर है:
निफ्टी ऑटो: यह आज का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से इनपुट लागत बढ़ने और मांग घटने की आशंका है.
आईटी सेक्टर: अन्य क्षेत्रों की तुलना में आईटी इंडेक्स ने थोड़ी मजबूती दिखाई, हालांकि यह भी मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में ही कारोबार कर रहा था.
वोलाटिलिटी और टेक्निकल नजरिया
बाजार में घबराहट का अंदाजा India VIX से लगाया जा सकता है, जो 6.08% उछलकर 22.34 पर पहुंच गया. यह दर्शाता है कि निवेशक निकट भविष्य में और अधिक उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं. तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,500–23,600 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन है. यदि बाजार इसके नीचे बंद होता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है.
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों का $100 के ऊपर टिके रहना भारत के राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति के लिए बड़ी चुनौती है. निवेशकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और सरकार के संभावित कदमों पर टिकी है.


