Friday, March 27, 2026

भारतीय रेलवे में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है

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दक्षिण मध्य रेलवे ने अपने स्टेशनों पर साइंटिफिक वेस्ट मैनेजमेंट के माध्यम से एक परमानेंट वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है. यह ऐसा समय में हुआ है, जब राज्य सरकार की एजेंसियां ​​केवल अपनी जमीन से कचरा इकठ्ठा और मैनेज कर रही थीं.

इस पहल की आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी (नाम न छापने की शर्त पर) ने ईटीवी भारत को बताया, “रेलवे ने देखा कि राज्य सरकार की एजेंसियां ​​स्टेशनों और कॉलोनियों सहित रेलवे की जमीनों में वेस्ट मैनेजमेंट नहीं कर रही थीं, जिसके बाद रेलवे ने अपने क्षेत्र से कचरे का उचित निपटान करने की पहल शुरू की.”

अधिकारी ने कहा, “शुरुआत में यह काम सीमित जगह पर शुरू किया गया था, लेकिन अब यह एक बड़े क्षेत्र में किया गया है, जो अब संरचित और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को लागू करने में अग्रणी बन गया है.”

हैदराबाद डिवीजन के वरिष्ठ डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर डॉ अनिरुद्ध पामर ने कहा, “वेस्ट मैनेजमेंट कॉन्टरैक्ट इनिशिएटिव के तहत रेलवे ने काचीगुडा, निजामाबाद और कुरनूल सिटी रेलवे स्टेशनों पर वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों के लिए 12 सितंबर 2027 तक की अनुबंध अवधि के लिए स्क्रैपक्यू हब के साथ साझेदारी की है, जो एक ऑथोराइज्ड रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबलिटी सोल्यूशन प्रोवाइडर है.”

परमानेंट वेस्ट मैनेजमेंट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए SCR के जनरल मैनेजर संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “यह पहल रेलवे परिसरों को स्वच्छ, ग्रीन और पर्यावरण के प्रति जागरूक क्षेत्रों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सरकार के ‘स्वच्छ भारत मिशन’, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों और अपशिष्ट उपयोग में एक स्थायी, सर्कुलर इकोनॉमी के लिए रेलवे बोर्ड के दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से संरेखित है.”

अन्य प्रमुख सेक्टर्स के अलावा रेलवे ने स्वच्छता पर विशेष जोर दिया, जिसका उद्देश्य स्वच्छता, पर्यावरणीय स्थिरता और रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों और आम जनता के बीच जन जागरूकता को बढ़ावा देना है. रेल मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों, कार्यालयों, कॉलोनियों और कार्यशालाओं में स्वच्छता के हाई स्टैंडर्ड को बनाए रखना है. साथ ही कर्मचारियों और यात्रियों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करना है.

प्रमुख उपलब्धियां
इस पहल से लगभग 108 टन रीसाइक्लेबल सामग्री एकत्रित हुई है, जिसमें 65 प्रतिशत प्लास्टिक, 30 प्रतिशत कागज- कार्टन और 5 प्रतिशत एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं. गैर-फेयर रेवेन्यु (NFR) के माध्यम से प्रति वर्ष 5.51 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ और स्थानीय समुदायों के लिए लगभग 50 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए.

पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
इस परियोजना के परिणामस्वरूप पर्यावरणीय लाभ हुए हैं, जैसे कार्बन इमिशन में कमी, 132 टन CO2 को वायुमंडल में जाने से रोकना और ऊर्जा संरक्षण शामिल हैं. साथ ही रीसाइक्लिंग द्वारा बचाई गई एनर्जी के माध्यम से प्रति माह 500 घरों को बिजली देने के बराबर था. सभी रीसाइक्लेबल सामग्री का प्रमाणित माध्यमों से पुन उपयोग किया जाता है, जिससे लैंडफिल में निपटान की आवश्यकता नहीं होती. पर्यावरण को कार्बन फुटप्रिंट में कमी, अपशिष्ट का चक्रीय उपयोग और लैंडफिल अनुपालन शून्य जैसे प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं.

मास्टर रिकवरी फैसिलिटी पर प्रोसेसिंग
प्रत्येक निर्दिष्ट स्टेशन पर एकत्रित सभी कचरे की MRFs में वैज्ञानिक रूप से प्रोसेसिंग की जाती है. कचरे को रीसाइक्लेबल, गीले और सूखे भागों में अलग किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित होता है. अलग की गई रिसाइक्लेबल मटेरियल—मुख्य रूप से प्लास्टिक, कागज, कार्टन और एल्युमीनियम स्क्रैप—स्क्रैपक्यू द्वारा प्रमाणित पुनर्चक्रणकर्ताओं को बेची जाती हैं.

इन मटेरियल को पॉलिएस्टर यार्न जैसे बाय-प्रोडक्ट्स में परिवर्तित किया जाता है, जिनका उपयोग बाद में जूते और परिधान सहित टिकाऊ उत्पादों के निर्माण में किया जाता है. यह चक्रीय प्रक्रिया 80 प्रतिशत से अधिक कचरे को लैंडफिल से हटा देती है, जिससे संसाधन दक्षता और कार्बन बचत को बढ़ावा मिलता है.

भारतीय रेलवे का बुनियादी ढांचा
राज्यसभा के आंकड़ों के अनुसार इस संबंध में महत्वपूर्ण पहल की गई है. भारतीय रेलवे में कई स्थानों पर आवश्यकतानुसार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs), सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) और इफलुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETPs) मटेरियस रिकवरी फैसेलिटी (MRF) जैसे बुनियादी ढांचे स्थापित और चालू किए गए हैं। वर्तमान में, 142 एसटीपी, 86 ईटीपी और 203 एमआरएफ स्थापित हैं.

कचरा निपटान के लिए गठजोड़
स्थानीय परिस्थितियों, व्यवहार्यता और आवश्यकता के आधार पर स्थानीय रेलवे अधिकारियों और नगर निकायों के बीच कचरा निपटान के लिए गठजोड़ किए गए हैं.

प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें
भारतीय रेलवे में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और आवश्यकतानुसार 531 स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें (PBCM) स्थापित की गई हैं. बायो-डिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे को अलग करने के लिए 725 स्थानों पर दो-दो डस्टबिन प्रकार के कूड़ेदानों का प्रावधान किया गया है. कचरा प्रबंधन से संबंधित मामलों की निगरानी/संचालन के लिए क्षेत्रीय रेलवे में समर्पित पर्यावरण और गृह व्यवस्था (EnHM) शाखाएं स्थापित की गई हैं.

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