बोकारो प्रशासन और पुलिस बच्चा चोर की अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। लगभग 300 अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिन पर आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून हाथ में न लेने की अपील की है
बोकारो। बोकारो में कथित बच्चा चोर की अफवाहों को हवा देने वाले सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस अब सख्त रुख अपनाने जा रही है।
प्रशासन ने फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय उन अकाउंट्स की पहचान शुरू कर दी है, जिनसे छोटी-बड़ी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर अफवाह के रूप में प्रसारित किया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक करीब 300 सोशल मीडिया अकाउंट चिह्नित किए जा चुके हैं, जो बोकारो जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं।
इन अकाउंट्स पर आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है और चेतावनी दी गई है कि अफवाह फैलाने वाले वीडियो तत्काल नहीं हटाए गए तो कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में अफवाहों के कारण कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती मिली है। उपायुक्त डॉ. अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने संयुक्त रूप से आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। किसी भी संदिग्ध स्थिति में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर सूचना दें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
हाल की घटनाओं को लेकर लिया एक्शन
प्रशासन के अनुसार शुक्रवार को जिले में तीन घटनाएं सामने आईं, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बच्चा चोर’ बताकर भ्रामक तरीके से प्रचारित किया गया। पहली घटना नेटवर्किंग के माध्यम से डी-एक्शन कंपनी की दवा बेचने वाली मनीषा देवी से जुड़ी है, जहां ग्रामीणों ने अफवाह के आधार पर उनके साथ बदसलूकी की और पुलिस के हस्तक्षेप के दौरान भीड़ ने पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और किसी तरह महिला की जान बचाई गई। दूसरी घटना चास के बंसीडीह क्षेत्र में हुई, जहां उत्तर प्रदेश से आए साधुओं के एक समूह को भीड़ ने ‘बच्चा चोर’ बताकर घेर लिया।
तीसरी घटना चंदनकियारी की है, जहां पश्चिम बंगाल से घूमने आई महिलाओं को ग्रामीणों ने रोककर पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इन तीनों ही मामलों में तथ्यों की पुष्टि किए बिना सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट वायरल किए गए।
व्यूज के लिए बनाते हैं गलत शीर्षक से वीडियो
कई तथाकथित इनफ्लुएंसर्स ने व्यूज और लाइक बटोरने के लिए घटनाओं को गलत शीर्षक और भड़काऊ भाषा के साथ प्रसारित किया, जिससे अफरातफरी और हिंसा की स्थिति बनी।
बालीडीह की घटना में बोकारो, जैनामोड़ सहित आसपास के कई इनफ्लुएंसर्स ने महिला को सामुदायिक भवन से गाड़ी तक ले जाते हुए वीडियो को तेज करते हुए ऐसा दिखा गया और कैप्शन में लिखा गया कि बच्चा चोर को बचाकर ले जाती पुलिस है।
ऐसे वीडियो डालने वालों की तलाश बालीडीह पुलिस ने शुरु कर दिया है। प्रशासन ने साफ कहा है कि ऐसे कंटेंट को न केवल हटवाया जाएगा, बल्कि संबंधित अकाउंट संचालकों के खिलाफ आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अधिकारियों ने यह भी चेताया कि चिह्नित अकाउंट्स के संचालकों के घर-घर जाकर पुलिस सत्यापन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारियां भी होंगी।


