मुंबई: माया नगरी मुंबई में साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. उच्च शिक्षित और प्रतिष्ठित लोग भी धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं. हाल ही में मुंबई में देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है. चिकित्सा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और उनकी पत्नी से 58 करोड़ रुपये की ठगी की गयी थी. इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
साइबर अपराध विभाग के पुलिस महानिदेशक यशस्वी जायसवाल ने यह जानकारी दी. कफ परेड में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया, “मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला है कि इस धोखाधड़ी में 6,500 से ज़्यादा बैंक खाते शामिल थे. अब तक हमने 4 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं. लगभग 9 टीमें इस पर काम कर रही हैं.”

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि बुजुर्ग दंपति को 40 दिनों तक मानसिक यातना दी गई. फर्जी अदालतें और पुलिस स्टेशन बनाकर उन्हें ‘डिजिटल गिरफ्तार’ करके रखा गया था. अदालत में फर्जी जज, वकील और गवाह भी थे. इन 40 दिनों के दौरान, हर दो घंटे में पीड़ितों के बारे में जानकारी ली जाती रही कि वे क्या कर रहे थे और कहां थे, जिसके कारण उन्हें भारी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी.
यशस्वी जायसवाल ने बताया कि पीड़ित दंपति के दो बच्चे विदेश में हैं, इसके बावजूद उन्होंने उन्हें इस परेशानी के बारे में कुछ नहीं बताया. साइबर अपराधियों ने इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए अलग-अलग देशों से व्हाट्सएप कॉल और लॉगिन का इस्तेमाल किया. इन 40 दिनों में पीड़ित 26 बार बैंक गए और पैसे भेजे. उन्होंने बताया कि पीड़ित, जो वरिष्ठ नागरिक हैं 10 से ज़्यादा बार बैंक गए, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने नोटिस नहीं किया. इसके पीछे लापरवाही है या मिलीभगत, इसकी जांच चल रही है.
यशस्वी जायसवाल ने बताया, “पीड़ित दंपति को जब ठगे जाने का अहसास हुआ तो उनके एक दोस्त ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी, लेकिन पीड़ितों ने 11 दिनों तक शिकायत दर्ज नहीं कराई. आखिरकार 12 अक्टूबर को उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और कुछ ही दिनों में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में शेख शहीद अब्दुल सलाम, जफर सईद, इमरान शेख, मोहम्मद नावेद शेख और तीन अन्य शामिल हैं. आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों खाते खोले. यशस्वी जायसवाल ने कहा कि, “बैंकों को खाता खोलते समय ग्राहकों की सभी जानकारियों और केवाईसी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए. हम रिजर्व बैंक से इस संबंध में संशोधन करने का अनुरोध कर रहे हैं.”


