मुंबई : बीएसई सेंसेक्स 702.68 अंक गिरकर 76,847.57 अंक पर बंद, एनएसई निफ्टी 207.95 अंक टूटकर 23,842.65 अंक पर रहा. हालांकि, बेंचमार्क इंडेक्स शुरुआत में बड़ी गिरावट से खुला था. बाद में रिकवरी हुई. शेयर बाजार में उठापटक की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी है. उन्होंने धमकी दी है कि अगर ईरान नहीं माना, तो वे होर्मुज को बंद कर देंगे और वहां से किसी भी देश के जहाज को गुजरने नहीं देंगे.
ट्रंप के इस कथन का असर बाजार पर साफ तौर पर देखा जा सकता है. इंडेक्स के भारीभरकम शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी और मारुति में बिकवाली देखी गई. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रुपये पर दबाव पड़ा है.
आपको बता दें कि 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 75,937.16 अंक पर खुला था. शुक्रवार को यह 77,550 पर बंद हुआ था. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 आज 23,589.60 पर खुला. शुक्रवार को यह 24050 पर बंद हुआ था.
आज के लूजर्स में मारुति का नाम सबसे आगे रहा. उसमें करीब-करीब पांच फीसदी की गिरावट देखी गई. इसी तरह से अन्य लूजर्स में एचडीएफसी, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, इंडिगो, एटरनल और टाइटन जैसी कंपनियां रहीं.
जहां तक बढ़ने वाले शेयरों की बात है, तो इनमें आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक प्रमुख रहे. निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.54 प्रतिशत और 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए.
आज के कारोबार में निफ्टी ऑटो और निफ्टी ऑयल एंड गैस में सबसे अधिक गिरावट देखी गई. आईटी सेक्टर भी कमजोर रहा. निफ्टी मेटल ने थोड़ी मजबूती दिखाई, इसलिए उसमें सबसे कम गिरावट दर्ज की गई.
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 7.73 प्रतिशत बढ़कर 102.6 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट मामूली बढ़त में रहा.
यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख था. अमेरिकी बाजार शुक्रवार को मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए थे.
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘बाजारों को पिछले सप्ताह के युद्धविराम समझौते से सीमित समर्थन मिल रहा है. चुनिंदा लिवाली के साथ-साथ गिरावट पर लिवाली देखने को मिल रही है. अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा पर शुरुआती नकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद यह देखने को मिल रहा है। हालांकि, वार्ता विफल होने से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी है.’’
नायर ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति, मुद्रा स्थिरता और वृहद आर्थिक संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ा रही हैं, जिससे कुल मिलाकर बाजार धारणा पर दबाव पड़ रहा है.
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 672.09 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
सेंसेक्स शुक्रवार को 918.60 अंक बढ़कर 77,550.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 275.50 अंक चढ़कर 24,050.60 अंक पर रहा था.
इस बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को प्रस्तावित कोयला एक्सचेंज के लिए ‘नेशनल कोल एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड’ नाम आरक्षित करने की कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) से मंजूरी मिल गई है. यह कदम फरवरी में एनएसई के निदेशक मंडल द्वारा इस पहल के लिए पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी स्थापित करने की मंजूरी के बाद उठाया गया है. प्रस्तावित नामों में नेशनल कोल एक्सचेंज, भारत कोल एक्सचेंज और इंडिया कोल एक्सचेंज शामिल थे.
एनएसई ने बयान में कहा कि इस उद्यम में वह शुरुआत से 100 करोड़ रुपये तक की पूंजी लगाएगा और इसमें उसकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य भागीदारों को दी जाएगी.


