बिहार में पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को और प्रभावी बनाया है. यह योजना पहली बार 2016 में शुरू की गई थी, जिसका मकसद नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आर्थिक सहारा देना है. वर्ष 2025 में इसके दायरे को बढ़ाकर ज्यादा युवाओं को शामिल किया गया है, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल सके.
अब ग्रेजुएट युवा भी होंगे पात्र
पहले इस योजना का लाभ केवल 12वीं पास बेरोजगार युवाओं को मिलता था, लेकिन अब कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय से स्नातक युवा भी इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं. सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद नौकरी न मिलने से युवाओं में निराशा बढ़ती है, ऐसे में यह योजना उन्हें नई दिशा दे सकती है.
कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत पात्र युवाओं को हर महीने 1000 रुपये दिए जाते हैं. यह राशि अधिकतम 2 साल तक मिलती है. इस तरह एक वर्ष में 12,000 रुपये और दो साल में कुल 24,000 रुपये तक की सहायता प्राप्त होती है. यह पैसा नौकरी खोजने, ट्रेनिंग लेने या रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है.
पात्रता की शर्तें क्या हैं
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए. वह बेरोजगार हो और किसी तरह की पढ़ाई या नौकरी में शामिल न हो. आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए और उसे किसी अन्य सरकारी भत्ता, स्कॉलरशिप, लोन या स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ नहीं मिल रहा हो. इसके अलावा वह न तो सरकारी या निजी नौकरी में हो और न ही कोई खुद का व्यवसाय कर रहा हो.
स्किल ट्रेनिंग अनिवार्य
योजना के अंतर्गत युवाओं को बेसिक कंप्यूटर कोर्स करना जरूरी है, जिसे श्रम संसाधन विभाग द्वारा संचालित किया जाता है. ट्रेनिंग पूरी करने और प्रमाण पत्र जमा करने के बाद ही अंतिम 5 महीनों का भत्ता दिया जाता है. इसका उद्देश्य युवाओं के कौशल को बढ़ाकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाना है.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय आधार कार्ड, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, निवास प्रमाण पत्र और भरा हुआ कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना होगा. कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना बिहार के बेरोजगार युवाओं के लिए आर्थिक सहारे के साथ-साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद भी लेकर आई है.


