बिहार में पुल गिरने की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने इस मामले को पटना हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है और 14 मई से नियमित सुनवाई और मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं. याचिका में राज्य के पुलों की संरचनात्मक जांच और एक विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी.
बिहार में पुलों के लगातार गिरने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे पटना हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को 14 मई से इस मामले की सुनवाई शुरू करने और मासिक आधार पर निगरानी करने का निर्देश दिया है.
याचिका में क्या थी मांग?
बिहार में नौ पुलों के गिरने के बाद जुलाई 2024 में एक लोकहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें राज्य के सभी पुलों की संरचनात्मक जांच और एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के जवाबी हलफनामे पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया.
न्यायमूर्ति संजय कुमार की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “तीन निर्माणाधीन पुल गिर गए, लेकिन अधिकारियों को निलंबित कर फिर बहाल कर दिया गया. इससे साफ है कि सभी मिले हुए हैं.” इस पर बिहार सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि 10,000 से अधिक पुलों का निरीक्षण किया गया है और कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई चल रही है.
3500 पुलों का बनेगा हेल्थ कार्ड, ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी लागू होगी
इधर, बिहार सरकार ने पुलों की निगरानी को लेकर बड़ा फैसला लिया है. पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बुधवार को बताया कि राज्य के 3,500 से अधिक पुलों का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा और बहुत जल्द ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी लागू होगी. इस नीति के तहत हर महीने पुलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की योजना है.
हाई कोर्ट करेगा पुलों की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पटना हाई कोर्ट हर महीने इस मामले की समीक्षा करेगा और सुनिश्चित करेगा कि पुलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. अब हाईकोर्ट के आदेश पर बिहार सरकार को अपनी पुलों की निगरानी नीति और सुधारात्मक कदमों को प्रभावी बनाना होगा.
