Monday, February 23, 2026

फाल्गुन शुक्ल एकादशी का व्रत 27 फरवरी को आर्द्रा नक्षत्र व आयुष्मान योग में मनाया जाएगा।

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फाल्गुन शुक्ल एकादशी, जिसे रंगभरी और आमलकी एकादशी भी कहते हैं, 27 फरवरी को आयुष्मान योग में मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की विशेष पूजा का विधान है। शुभ योगों में पूजा-पाठ से विशेष पुण्य मिलता है। आंवले के वृक्ष की पूजा का भी महत्व है, जिसे अक्षय नवमी के समान फलदायी माना गया है।

पटना। फाल्गुन शुक्ल एकादशी का व्रत 27 फरवरी को आर्द्रा नक्षत्र व आयुष्मान योग में मनाया जाएगा। एकादशी व्रत को साधु-संत, वैष्णव एवं गृहस्थ एक साथ करेंगे। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी एवं आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

सभी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, लेकिन रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव की भी विशेष आराधना का विधान है।

ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, वर्ष एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग और आयुष्मान योग का भी संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में पूजा-पाठ, जप, हवन एवं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन शालिग्राम की पूजा कर आंवला अर्पित किया जाएगा।

साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम एवं पुरुषसूक्त का भी पाठ होगा। वहीं, भगवान शिव का बेलपत्र, भांग और अबीर-गुलाल से विशेष शृंगार किया जाएगा।

एकादशी पर आंवला पूजा का विधान

आमलकी एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सर्वप्रथम आंवला वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। इसके स्मरण मात्र से गौदान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि आंवला वृक्ष के मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, तने में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और फलों में समस्त प्रजापति का वास होता है।

रंगभरी एकादशी का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 05:09 बजे से 05:59 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक
  • विजय मुहूर्त : दोपहर 02:29 से 03:15 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रात:काल 10:48 से पूरी रात्रि तक 
  • एकादशी के पारण का समय: 28 फरवरी 2026 की सुबह 06:47 से 09:06 बजे तक

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