Saturday, March 7, 2026

फरवरी में वैश्विक गोल्ड ETF निवेश $5.3 बिलियन बढ़ा, कुल संपत्ति $701 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची और भारत में $565 मिलियन आए.

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नई दिल्ली: वैश्विक निवेशकों के बीच सोने के प्रति आकर्षण लगातार बना हुआ है. फरवरी 2026 में लगातार नौवें महीने वैश्विक गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के दौरान दुनिया भर में गोल्ड ईटीएफ में 5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ, जिससे कुल वैश्विक प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (AUM) 701 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गईं.

वैश्विक बाजार की स्थिति: उत्तर अमेरिका सबसे आगे
फरवरी में सोने की मांग का नेतृत्व एक बार फिर उत्तर अमेरिकी बाजार ने किया. अकेले इस क्षेत्र से 4.7 बिलियन डॉलर का निवेश आया. यह उत्तर अमेरिका के लिए लगातार नौवां महीना था जब निवेशकों ने सोने पर भरोसा जताया.

इसके मुख्य कारणों में अमेरिका-ईरान तनाव जैसे भू-राजनीतिक जोखिम, डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों में गिरावट के संकेत शामिल हैं. साथ ही, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के शुल्कों (Tariffs) पर आए हालिया फैसले के बाद व्यापार और नीतिगत अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की ओर मोड़ा है.

भारत का प्रदर्शन: $565 मिलियन का निवेश
भारतीय बाजार में भी गोल्ड ईटीएफ के प्रति सकारात्मक रुझान बना रहा. फरवरी में भारत में 565 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 4,700 करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश हुआ. हालांकि, यह पिछले दो महीनों के औसत ($2 बिलियन) की तुलना में कम है, लेकिन फिर भी इसे एक ‘स्वस्थ प्रवाह’ माना जा रहा है.

भारतीय बाजार में आए इस निवेश के पीछे दो मुख्य कारण रहे:

सेबी (SEBI) के नियम: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा हाल ही में म्यूचुअल फंडों को सोने और चांदी के उपकरणों में निवेश के लिए अधिक लचीलापन दिया गया है, जिससे ईटीएफ में रुचि बढ़ी है.

कीमतों में सुधार: जनवरी के अंत में आई गिरावट के बाद फरवरी में सोने की कीमतों में आई तेजी ने नए खरीदारों को आकर्षित किया.

स्थानीय स्तर पर कीमतें क्यों गिरीं?
दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें फरवरी में 5% बढ़कर 5,222 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गईं, लेकिन भारत और चीन में स्थानीय कीमतें गिर गईं.

भारत: अमेरिका के साथ शुल्क राहत (Tariff Relief) के बाद भारतीय रुपये में तेज मजबूती आई, जिससे घरेलू बाजार में सोने की कीमत 3.5% गिरकर 158,585 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर आ गई.

चीन: रेनमिन्बी (RMB) में आए उछाल के कारण वहां भी स्थानीय कीमतों में 1.3% की गिरावट दर्ज की गई.

यूरोप में दिखा उल्टा रुख
जहां पूरी दुनिया सोने में पैसा लगा रही थी, वहीं यूरोप एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां से निकासी (Outflows) देखी गई. फरवरी में यूरोपीय फंडों से 1.8 बिलियन डॉलर बाहर निकले. इसका मुख्य कारण जनवरी के अंत में कीमती धातुओं में हुई बिकवाली के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना बताया जा रहा है.

फरवरी के अंत में मध्य पूर्व (Middle East) में भड़के नए संघर्ष ने मार्च की शुरुआत में ही बाजारों में हलचल पैदा कर दी है. मार्च के पहले दो कारोबारी दिनों में ही सोने की कीमतों में 5% का उछाल देखा गया. ऐतिहासिक रूप से, जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, सोने ने 66% मामलों में सकारात्मक रिटर्न दिया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता और सॉफ्टवेयर/SaaS सेक्टर में जारी गिरावट बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में भी निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ को प्राथमिकता देते रहेंगे. फिलहाल, 2026 की शुरुआत सोने के लिए अब तक की सबसे मजबूत शुरुआत साबित हुई है.

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