Thursday, April 3, 2025

प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया. शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए. सरना धर्म कोड की भी मांग उठी.

Share

रांचीः सरहुल के मौके पर निकाली गई शोभायात्रा मंगलवार देर रात तक चलती रही. इस शोभायात्रा में विविध रंगों में सजे जनजाति समुदाय की भारी भीड़ राजधानी के मेनरोड से गुजरती रही. हालत ऐसी कि राजधानी की ह्रदयस्थली कहा जाने वाला अल्बर्ट एक्का चौक पर खड़ा होने तक की जगह लोगों को नहीं मिल रही थी.

देर रात तक बिजली के रंग-बिरंगी रोशनी में झूमते-नाचते लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था. खास बात यह कि शोभायात्रा में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या अधिक थी. शोभायात्रा की कमान संभाले युवाओं की टोली ने इसे यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जिसके कारण देर रात तक सड़कों पर हजारों लोग प्रकृति के इस महापर्व का आनंद उठाते रहे.

झांकी के जरिए सरना धर्म कोड की उठी मांग

सरहुल के मौके पर निकाली गई एक दर्जन से अधिक झांकियों में सरना धर्म कोड की मांग सबसे चर्चा का विषय बना रहा. झांकी के जरिए धर्मांतरण की एक वजह सरना धर्म कोड अब तक लागू नहीं होना बताया गया. इस झांकी में बड़े बड़े अक्षरों में सरना धर्म नहीं होने के कारण मजबूरीवश अन्य धर्मो को अपनाने और सरकारी नौकरी आवेदन में अन्य कॉलम हटाए जाने के कारण मजबूर होकर दूसरे धर्म के कॉलम में सहमति दिए जाने की बात लिखकर इशारा किया गया है.

Demand for Sarna Dharma Code arose during the nature festival Sarhul

सिरमटोली केंद्रीय सरना स्थल विवाद पर भी सरहुल शोभायात्रा के दौरान बड़े ही आकर्षक ढंग से झांकी निकाली गई, जिसमें आदिवासियों के धार्मिक सांस्कृतिक स्थल को संरक्षित करने पर जोर दिया गया. देर रात तक चले इस शोभायात्रा के दौरान अल्बर्ट एक्का चौक पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य सरीखे नेता मौजूद रहे.

Demand for Sarna Dharma Code arose during the nature festival Sarhul

चतरा में निकली शोभायात्रा

Demand for Sarna Dharma Code arose during the nature festival Sarhul

केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में चतरा के पकरिया स्थित टोंगरी पर प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया. टोंगरी स्थित सरना स्थल के पास मुख्य पाहन ने प्रकृति की पूजा आदिवासी रीति रिवाज से की. इसके बाद सरना स्थल पर भव्य सभा का आयोजन हुआ. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डीसी रमेश घोलप और विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता और जिला परिषद उपाध्यक्ष बिरजू तिवारी उपस्थित थे. अतिथियों का पाहन ने फूलकोसी कर स्वागत किया.

Demand for Sarna Dharma Code arose during the nature festival Sarhul

इसके बाद सरना स्थल के पास झुमर का आयोजन हुआ. जिसमें डीसी और पूर्व मंत्री समेत अन्य नेता और अधिकारी मांदर के थाप पर जमकर झूमे. अतिथियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के महिला-पुरूष भी मांदर व नगाड़े की थाप पर जमकर नाचे. इसके बाद वाहनों को पेड़ की डालियों व फूल पत्तो से सजाकर सरना स्थल से झांकी निकाली गई.

Read more

Local News