Sunday, April 5, 2026

पुत्र की दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना के लिए मनाया जाने वाला तीन दिवसीय पर्व जितिया पर्व

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केवटी में जितिया पर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। यह पर्व पुत्रों की लम्बी आयु के लिए मनाया जाता है। व्रती महिलाएं उपवास रखेंगी और नमकीन व्यंजनों का भोग लगाएंगी। इस पर्व में राजा जिमुतवाहन की कथा का महत्व है। मरूआ और मटर खाने की परंपरा है जिससे संतानों को शक्ति मिलती है। बाजारों में चहल-पहल है और सब्जियों के

। पुत्र की दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना के लिए मनाया जाने वाला तीन दिवसीय पर्व जितिया शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ।

व्रती पर्व के दूसरे दिन रविवार को उपवास रखेंगी और तीसरे दिन सोमवार की सुबह नमकीन लजीज व्यंजनों का भोग लगा पारण करेंगी।

पर्व को लेकर क्षेत्र के व्रती महिलाओं में एक अलग उत्साह देखा जा रहा है। सब्जियों, फलों, परचून, श्रृंगार आदि की दुकानों में भीड़ देखी जा रही है। बाजारों में चहल-पहल बढ़ गयी है।

क्या है मान्यता 

प्राचीन काल में महर्षि धौम्य द्वारा नैमीशरण क्षेत्र में 88 हजार ऋषियों की सभा में राजा जिमुतवाहन के दयालुता की कथा सुनाने का जिक्र शास्त्रों में मिलता है। जिससे जितिया पर्व जुड़ा है।

कथा के अनुसार एक बार राजा जिमुतवाहन अपनी पत्नी के साथ ससुराल गये हुए थे। वहां उन्हे कई महिलाओं की पुत्र शोक की क्रंदन सुनाई दी। जिज्ञासा वश राजा इसका कारण जानने पहुंच गये।

शोकाकुल महिलाओं ने राजा को अपनी व्यथा-कथा सुना दी। सभी को ढांढस बंधा राजा उस स्थान पर गये जहां पक्षी राज गरूड़ गांव के बच्चों को ले जाकर खाते थे। गरूड़ ने जिमुतवाहन पर हमला कर उसका बायां हाथ खा गया। राजा ने दायां हाथ भी बढ़ा दिये। गरूड़ समझ गया। परिचय बात हुई।

पक्षी राज राजा के दयालुता एवं मानव सेवा धर्म से प्रसन्न हो वरदान मांगने को कहा। मारे गये सभी बच्चे को जीवित करने तथा मां के रहते संतान की मौत न होने का वरदान राजा मांगे। उसी राजा के याद में जितिया पर्व माताएं अपनी संतानों को दीर्घायु होने के लिए मनाती है।

क्यों खाते है मरूआ-मटर 

व्रती इस पर्व में मरूआ व मटर (जो अंकुर न सके) ग्रहण करती है। मडु़आ बहुत कठोर और विपरीत हालत में अपना प्राण बचा लेने वाला फसल है। मटर के कुछ ऐसे दाने होते है, जो नहीं अंकुरते।

मान्यता है कि इन दोनों अनाज को खाने से संतानों में अपनी प्राण रक्षा व शरीर वज्र के समान मजबूत होने की शक्ति बढ़ती है। इस पर्व को लेकर सब्जियों के दाम बढ़ गये है। पारण के दिन लोग कई प्रकार की सब्जियां खाते हैं। गले या बांह में जिउतमहल धारण करने का रिवाज है, जो सोने या फिर धागे के बनाये जाते हैं।

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