पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में स्थित टाटा मोटर्स के प्लांट से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दिखाती है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर यह बात खास तौर पर चर्चा में है कि टाटा सफारी और टाटा हैरियर जैसी लोकप्रिय एसयूवी गाड़ियों को यहां पूरी तरह महिलाओं की टीम तैयार करती है. यह पहल भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए गर्व की बात मानी जा रही है.
टाटा मोटर्स ने साल 2021 में पुणे प्लांट में एक खास असेंबली लाइन शुरू की थी. इस लाइन पर सफारी और हैरियर एसयूवी को तैयार किया जाता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ज्यादातर काम महिलाएं करती हैं. इस असेंबली लाइन पर करीब 1500 महिलाएं काम कर रही हैं, जो तीन अलग-अलग शिफ्ट में अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं. गाड़ी के निर्माण से जुड़े लगभग सभी अहम काम जैसे चेसिस तैयार करना, डोर फिटिंग, वायरिंग, इंजन असेंबली, ट्रिम और फाइनल फिटमेंट तक महिलाएं ही संभालती हैं.

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को लंबे समय तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. टाटा मोटर्स ने महिलाओं को वेल्डिंग, क्रैश टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल जैसी चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी मौका दिया है. इससे यह साबित होता है कि अगर मौका मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं.

कुल 7400 महिलाओं की टीम!
कंपनी के मुताबिक फिलहाल टाटा मोटर्स के शॉपफ्लोर पर करीब 7400 महिलाएं काम कर रही हैं. इनमें से 4000 से ज्यादा महिलाएं कमर्शियल वाहनों की असेंबली से जुड़ी हुई हैं. खास बात यह है कि सफारी और हैरियर की असेंबली लाइन पूरी तरह महिलाओं की टीम संभालती है. इस प्लांट में हर दिन लगभग 300 गाड़ियों का प्रोडक्शन होता है.

प्लांट हेड नीरज अग्रवाल ने बताया कि जब इस प्लांट की शुरुआत हुई थी तब महिलाओं के लिए जरूरी सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया था. शुरुआत में महिलाओं को इस क्षेत्र में लाने के लिए गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया. आज हालात ऐसे हैं कि तीनों शिफ्ट में महिलाएं ही काम कर रही हैं. उनकी सुरक्षा के लिए अलग से ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और घर तक छोड़ने की सुविधा भी दी गई है.

यहां काम करने वाली कई महिलाओं के लिए यह नौकरी सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि गर्व की बात भी है. कोल्हापुर की वैष्णवी सावंत बताती हैं कि जब वह सड़क पर टाटा सफारी देखती हैं तो उन्हें बहुत गर्व होता है. उन्हें अच्छा लगता है कि जिस गाड़ी को लोग पसंद कर रहे हैं, उसे बनाने में उनका भी योगदान है. वहीं, रायगढ़ की नेहा चरफळे कहती हैं कि प्लांट की शुरुआत से ही वह इस टीम का हिस्सा हैं और अब उन्हें इस बात पर गर्व है कि वे पूरी गाड़ी बनाने की प्रक्रिया में शामिल हैं.


