हजारीबाग: पीएम नरेंद्र मोदी का सपना हजारीबाग में दूर की कौड़ी साबित हो रही है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारीबाग में देश के दूसरे ट्राइबल स्टडी सेंटर की स्थापना की थी, ताकि आदिवासी समाज से जुड़े विषयों पर अध्ययन हो सके लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री की सोच को राज्य सरकार धरातल पर उतार पाने में नाकाम साबित रही है.
दरअसल, करोड़ों रुपए खर्च कर विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर में जनजातीय अध्ययन केंद्र बनाया गया था लेकिन आज ये वीरान पड़ा है. जनजातीय अध्ययन केंद्र 22 हजार स्क्वायर फीट के क्षेत्र में फैला है और इसमें 3 फ्लोर तक निर्माण है. जिसमें चार स्टूडियो, एक क्लासरूम, एक ऑडिटोरियम, एक डायरेक्टर ऑफिस, एक ओपन ऑफिस, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब के साथ शौचालय है
पूर्व सांसद जयंत सिन्हा ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
पूर्व सांसद ने जब ट्राइबल स्टडी सेंटर का अवलोकन किया तो उन्होंने दुख जाहिर करते हुए कहा कि आखिर जिला प्रशासन और राज्य सरकार का उदासीन रवैया ट्राइबल स्टडी सेंटर पर क्यों मेहरबान है? इन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि जल्द से जल्द इसे शुरू किया जाए. बीजेपी नेता जयंत सिन्हा ने भवन को उपयोग में नहीं लेने पर राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण ही प्रधानमंत्री का सपना हजारीबाग में साकार नहीं हो पाया है. राज्य सरकार एक ओर आदिवासी समाज के उत्थान की बात करती है लेकिन उनसे जुड़े अध्ययन केंद्र के प्रति उदासीन रवैया रखती है.

पीएम मोदी ने जनजातीय अध्ययन केंद्र का ऑनलाइन किया था शिलान्यास
पीएम नरेंद्र मोदी 17 फरवरी 2019 को जब हजारीबाग पहुंचे थे तो विनोबा भावे विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन केंद्र का ऑनलाइन शिलान्यास किया था. यह देश का दूसरा जनजातीय अध्ययन केंद्र है. इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज पर अध्ययन करने के लिए छात्रों को प्रेरित करना था. करोड़ों रुपए से बना भवन आज सरकारी उदासीनता की वजह से अध्ययन के लिए शुरू नहीं हो सका है. बता दें कि जनजातीय अध्ययन केंद्र को तत्कालीन सांसद जयंत सिन्हा के अथक प्रयास से बनाया गया था.


