Sunday, March 29, 2026

पाम संडे 2026 आज मनाया जा रहा है.

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पाम संडे 2026 आज मनाया जा रहा है. जानें खजूर रविवार का इतिहास, महत्व और क्यों यह ईस्टर से पहले ईसाई धर्म में विशेष स्थान रखता है.

पाम संडे, जिसे हिंदी में खजूर रविवार कहा जाता है, ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह हर वर्ष ईस्टर से एक सप्ताह पहले रविवार को मनाया जाता है. साल 2026 में यह पर्व 29 मार्च को मनाया जा रहा है. यह दिन प्रभु यीशु मसीह के यरूशलेम में आगमन की स्मृति में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब यीशु गधे पर सवार होकर यरूशलेम पहुंचे थे, तब लोगों ने उनके स्वागत में खजूर के पत्ते रास्ते में बिछाए और “होशाना” के जयकारे लगाए थे. इसी घटना को “विजय प्रवेश” के रूप में जाना जाता है.

क्या है खजूर रविवार

खजूर रविवार ईसाई समुदाय के लिए बेहद पवित्र और विशेष दिन होता है. इसी दिन से “होली वीक” यानी पवित्र सप्ताह की शुरुआत होती है, जो ईस्टर संडे तक चलता है. दक्षिण भारत में इसे ‘पैसन संडे’ भी कहा जाता है. इस अवसर पर चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं. श्रद्धालु ताड़ या खजूर के पत्तों के साथ जुलूस निकालते हैं, भजन-गीत गाते हैं और बाइबल का पाठ करते हैं. यह दिन आस्था, विनम्रता और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है.

पाम संडे का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

  • बाइबल के अनुसार, जब यीशु मसीह यरूशलेम पहुंचे, तब वहां के लोग अपने मुक्तिदाता का इंतजार कर रहे थे. उस समय यहूदी समुदाय का फसह पर्व भी निकट था. ऐसे में यीशु का आगमन लोगों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन गया.
  • लोगों ने उनके स्वागत में अपने वस्त्र और खजूर की डालियां मार्ग में बिछाईं और उन्हें एक राजा की तरह सम्मान दिया. उन्होंने “धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है” कहते हुए उनका अभिनंदन किया.
  • यरूशलेम में प्रवेश के बाद यीशु ने मंदिर को अवैध कब्जों से मुक्त कराया और लोगों को धर्म का उपदेश दिया. हालांकि, इस घटना के कुछ दिनों बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
  • हमें यह संदेश देता है कि प्रभु यीशु ने सदैव कमजोर, पीड़ित और सताए हुए लोगों का साथ दिया. उनका जीवन प्रेम, सेवा और त्याग का प्रतीक है, जो आज भी लोगों को प्रेरित करता है.

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