नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव की लहर अब भारत के शराब और बीयर उद्योग तक पहुँच गई है. कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आई बाधाओं के कारण देश के दो सबसे शक्तिशाली उद्योग निकायों ने राज्य सरकारों से शराब की कीमतों में 15 प्रतिशत तक की तत्काल वृद्धि करने की औपचारिक अपील की है.
संकट की मुख्य वजह: कच्चा माल और पैकेजिंग
उद्योग जगत के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता आई है. इसका सीधा असर शराब बनाने और उसे पैक करने वाली सामग्री पर पड़ा है. ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ (CIABC) के महानिदेशक अभिनव गिरी के मुताबिक, कच्चे माल की लागत अब “असहनीय” स्तर पर पहुँच गई है.
सबसे बुरा असर पैकेजिंग सेक्टर पर पड़ा है
- कांच की बोतलें: प्राकृतिक गैस (LNG) की कमी के कारण कांच निर्माताओं ने बोतलों के दाम 8-12% बढ़ा दिए हैं. GAIL जैसी कंपनियों ने कांच उद्योग को गैस की आपूर्ति में 40% तक की कटौती कर दी है.
- प्लास्टिक और कैप्स: बोतल के ढक्कन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर (PP और HDPE) की कीमतों में एक महीने के भीतर 30-35% का उछाल आया है.
- एल्युमिनियम और गत्ता: बीयर कैन में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम और पैकेजिंग के लिए उपयोग होने वाले कार्टन (गत्ते) के दाम भी लगभग दोगुने हो गए हैं.
कितनी बढ़ेगी आपकी जेब पर मार?
शराब उद्योग ने अलग-अलग सेगमेंट के लिए अलग-अलग वृद्धि का प्रस्ताव दिया है:
- इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL): CIABC ने राज्य सरकारों से प्रति केस (9 लीटर) 100 से 150 रुपये बढ़ाने की मांग की है.
- बीयर सेक्टर: ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (BAI), जो यूनाइटेड ब्रुअरीज (Heineken) और एब इनबेव (AB InBev) जैसी बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने प्रति केस 25 से 30 रुपये की बढ़ोतरी मांगी है.
राजस्व और सप्लाई पर खतरा
BAI के महानिदेशक विनोद गिरी ने चेतावनी दी है कि कई राज्यों में बीयर कंपनियां फिलहाल घाटे में चल रही हैं. यदि सरकार ने तुरंत कीमतों में संशोधन नहीं किया, तो कंपनियों का अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा. शराब उद्योग हर साल सरकारी खजाने में करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जमा करता है. उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो आने वाले महीनों में बाजार में शराब की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे सरकारी राजस्व को भी बड़ा नुकसान होगा.


