मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने घरेलू शेयर बाजार की कमर तोड़ दी. सोमवार को कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स ‘सेंसेक्स’ 1,836.57 अंक (2.46%) की भारी गिरावट के साथ 72,696.39 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ‘निफ्टी’ 601.85 अंक (2.60%) फिसलकर 22,512.65 पर आ गया.
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की मार
बाजार में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) 48 घंटों के भीतर खोलने की चेतावनी के बाद वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया. इसके जवाब में ईरान ने ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की धमकी दी है. इस तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 2.37% बढ़कर $108.73 प्रति बैरल पर पहुंच गईं, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई का खतरा बढ़ गया है.
निवेशकों में दहशत, ‘फियर इंडेक्स’ में उछाल
बाजार में अनिश्चितता का आलम यह था कि भारत का वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) 17% से अधिक उछलकर 26.73 पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच अत्यधिक डर को दर्शाता है. इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों की लगभग ₹14 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में तो और भी बुरा हाल रहा, जहां क्रमशः 3.69% और 4.16% की गिरावट दर्ज की गई.
सेक्टरवार प्रदर्शन
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली. सबसे ज्यादा मार कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल्स सेक्टर पर पड़ी, जो 5% से ज्यादा टूट गया. इसके अलावा रियल्टी और मेटल शेयरों में भी भारी गिरावट रही. हालांकि, आईटी (IT) शेयरों ने कुछ हद तक जुझारूपन दिखाया और अन्य सेक्टरों की तुलना में कम नुकसान उठाया.
प्रधानमंत्री का बयान
बाजार में मची उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में संबोधित करते हुए देश को आश्वस्त किया. उन्होंने कहा कि सरकार ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के माध्यम से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का तकनीकी ढांचा फिलहाल ‘बेयरिश’ (मंदी का) बना हुआ है. विश्लेषकों के अनुसार, ऊपर की ओर 22,650–22,700 का स्तर अब तत्काल रेजिस्टेंस (बाधा) के रूप में काम करेगा, जबकि 22,900 का स्तर एक मजबूत सप्लाई ज़ोन बन गया है. जब तक भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है.


