पलामूः पर्यावरण को बचाना एक बड़ी चुनौती है. कई इलाकों में लगातार जंगल घट रहे हैं और इसका प्रभाव पर्यावरण संतुलन पर पड़ रहा है. पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी पहल की है. वन विभाग की जमीन पर पौधा लगाने वाला व्यक्ति पेड़ का मालिक होगा. पेड़ से निकलने वाली उपज और अन्य तरह की सामग्री का मालिक आर्थिक आमदनी भी कर सकता है.
पलामू वन विभाग ने इसकी पहल की है और लोगों से पर्यावरण को बचाने के लिए अपील भी की है. वन विभाग ने खास मौके जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बरसी, पूर्वजों के नाम या अन्य खास मौके पर पेड़ लगाने की अपील की है. इस पेड़ का संरक्षण संबंधित व्यक्ति और विभाग करेगा. वन विभाग जमीन उपलब्ध करवा रहा है ताकि लोगों को पर्यावरण के संरक्षण के अभियान से जोड़ा जाए और जंगल के क्षेत्रफल को बढ़ाया जा सके.
ग्रामीणों के साथ बैठक करेगी वन समिति, भावनात्मक रूप से लोगों को जोड़ रहा विभाग
पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग भावनात्मक रूप से लोगों को जोड़ना चाहता है. जंगल एवं उसके आसपास में बसने वाले लोगों को वनोपज से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में भी बताया जा रहा है ताकि लोग इससे जुड़ सकें. वन समितियां ग्रामीण और अन्य लोगों साथ बैठक कर रही हैं और उन्हें इस अभियान के बारे में जानकारी दे रही हैं.

ग्रामीणों को आम, इमली, कटहल, महुआ और अमरूद जैसे पेड़ों के बारे में जानकारी दी जा रही है. इन पेड़ों का सबसे बड़ा फायदा है कि यह नगद पैसे देते हैं और पर्यावरण को संरक्षित भी करते हैं.
स्थानीय ग्रामीण एवं समुदाय को भावनात्मक रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिए जोड़ा जा रहा है. लोगों से अपील की जा रही है कि वह पौधा लगाएं, वन विभाग पौधों के लिए जमीन दे रहा है. साथ ही साथ देख-रेख की जिम्मेवारी भी उठा रहा है. लोग अपने पूर्वज या अन्य खास मौकों पर पेड़ लगा सकते हैं. इन पेड़ों से होने वाली उपज का उन्हें फायदा भी मिलेगा और वे उसके मालिक भी बनेंगे.- सत्यम कुमार, डीएफओ, पलामू
पलामू के इलाके में 1158.54 वर्ग किलोमीटर में जंगल फैला हुआ है. 2023 में पूरे भारत में फॉरेस्ट की सर्वे रिपोर्ट जारी हई थी. इस रिपोर्ट में पलामू के इलाके में 2.36 वर्ग किलोमीटर जंगल बढ़ाने की बात बताई गई थी. 560 वर्ग किलोमीटर के करीब खुला जंगल है जबकि 65.50 वर्ग किलोमीटर ही घना जंगल है.
पौधे का अपने हिसाब से नाम भी रख सकते हैं
हालांकि जंगल की डेंसिटी कम हुई थी. जंगल की बढ़ोतरी एवं डेंसिटी को बढ़ाने के लिए वन विभाग ने योजना तैयार की है. अगले कुछ वर्षों में एक लाख इमली के पेड़ लगाने का भी टारगेट रखा गया है. ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही फलदार पेड़ या पौधा उपलब्ध करवाया जाएगा. पौधा लगाने वाले व्यक्ति उस पेड़ का अपने हिसाब से नाम भी रख सकते हैं.


