पटना में आयोजित एक व्याख्यान में सैक-इसरो के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बिहार मौसम सेवा केंद्र और सैक-इसरो आपदा पूर्वानुमान पर काम कर रहे हैं। पश्चिम चंपारण और भागलपुर में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं, जिससे 15 दिन पहले चक्रवात की चेतावनी संभव होगी। यह पहल बिहार में आपदा प्रबंधन और जन कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
पटना। विधान परिषद के उप भवन सभागार में मंगलवार को अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (सैक-इसरो) के निदेशक नीलेश एम. देसाई एवं प्रसिद्ध वैज्ञानिक दीपक सिंह ने ‘अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विकास की नई सीमा’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
देसाई ने बताया कि बिहार मौसम सेवा केंद्र (बीएमएसके) और सैक-इसरो साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों से विभिन्न विषयों पर काम कर रहे हैं। उसमें आपदा (बाढ़, भूकंप, वज्रपात, शीतलहर, लू, आंधी-तूफान) आदि के पूर्वानुमान मुख्य हैं। पश्चिम चंपारण और भागलपुर जिले में डाप्लर वेदर रडार लगाया जा रहा है।
छठ पूजा जैसे बड़े अवसरों पर भीड़ नियंत्रण के लिए सेटेलाइट के प्रयोग से इसका प्रबंधन किया जा सकता है। राज्य के विभिन्न शहरों की वायु गुणवत्ता का पता लगा सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का प्रयोग कर और निरंतर डाटा का विश्लेषण कर हम 15 दिन पहले ही साइक्लोन और आंधी-तूफान की चेतावनी दे सकते हैं।
देसाई ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) की स्थापना एवं संस्थापक डा. विक्रम साराभाई के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को ऊंचाई तक ले जाने में डा. सीवी. रमण, डा. सतीश धवन एवं मिसाइल-मैन डा. एपीजे. अब्दुल कलाम के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
हम दूसरे विकसित देशों से प्रतिस्पर्द्धा के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की भलाई के लिए यह कार्यक्रम चला रहे हैं। विधान परिषद के उप सभापति प्रो. राम वचन राय, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विधान पार्षद, पदाधिकारीगण एवं कर्मचारीगण आदि कार्यक्रम में उपस्थित थे।
अंत में सभापति अवधेश नारायण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह व्याख्यान बहुत हीं उपयोगी रहा। मैं चाहूंगा कि देसाई और उनकी टीम पुन: परिषद को अपना बहुमूल्य समय दें।


