क्या आप कभी ऐसा सोच सकते हैं कि गेमर्स के लिए बनाया गया कोई गेमिंग ऐप किसी देश की राजनीति बदल सकता है. भारत के पड़ोसी देश नेपाल में आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है. Discord नाम के ऐप को सिर्फ गेमर्स की बातचीत के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इस ऐप को नेपाल के युवाओं ने देश की सरकार को बदलने तक के लिए भी इस्तेमाल कर लिया है. आइए हम आपको इस ऐप नेपाल में इस ऐप के महत्व को समझाते हैं.
हाल ही में नेपाल में एक बहुत बड़ा जन आंदोलन हुआ, जिसमें Gen Z युवाओं ने Discord ऐप का यूज़ करके ना सिर्फ विरोध प्रदर्शन को संगठित किया बल्कि देश के लिए पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री को भी चुन लिया.
Discord ऐप क्या है?
इस ऐप को मई 2015 में Jason Citron और Stanislav Vishnevskiy ने लॉन्च किया था. इस प्लेटफॉर्म को गेमर्स के लिए लॉन्च किया गया था. इन दोनों मिलकर गेमर्स के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया था, जहां वो गेमिंग परफॉर्मेंस पर असर पड़े बिना चैट कर सकते थे.
शुरुआत में, Discord गेमर्स को गेम से बाहर निकले बिना ही बातचीत करने की सुविधा देतचा था, लेकिन 2016 के अंत तक इस प्लेटफॉर्म के पास 25 मिलियन से भी ज्यादा यूज़र्स हो गए. कोरोना वायरस महामारी के दौरान इस प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता, खासतौर पर जेन-ज़ी युवाओं के बीच में काफी तेजी से बढ़ी.उसके बाद यूज़र्स ने इस प्लेटफॉर्म पर गेमिंग के अलावा भी अलग-अलग टॉपिक्स के लिए सर्वर बनाने शुरू कर दिए.
अब Discord पूरी तरह से एक कम्यूनिकेशन प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां यूज़र्स अलग-अलग सर्वर्स और चैनल्स के जरिए आपस में जुड़ सकते हैं और बातचीत कर सकते हैं. इस ऐप में टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो चैनल्स के साथ-साथ स्क्रीन शेयरिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और मोडरेशन टूल्स जैसे कई खास फीचर्स मिलते हैं.
यह ऐप एक बड़ा कम्यूनिटी स्पेस बनाने का मौका देता है, जिसमें अधिकतम 5 लाख यूज़र्स शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा इसमें एक बार में अधिकतम 2,50,000 यूज़र्स एक्टिव भी रह सकते हैं.
Discord ऐप ने नेपाल में क्या किया?
हाल ही में नेपाल में सब सरकार ने 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाया, तब युवाओं ने आपस में कम्यूनिकेट करने और जन आंदोलन करने के लिए एक नया रास्ता चुना और वो रास्ता Discord App था. इस ऐप पर ‘Youth Against Corruption’ नाम का एक सर्वर बनाया गया, जिसमें हजारों युवा जुड़े और वहीं से विरोध की रणनीति तैयार हुई.
इस सर्वर पर एक पोल जारी किया गया. उस पोल पर युवाओं ने वोट किया और उसी के जरिए पूर्व चीफ जस्टिस सुषिला कार्की को नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री चुना गया है. इस चुनाव को पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित किया गया था. South China Morning Post के अनुसार, वोटिंग में कुल 7,713 वोट पड़े और कार्की को 50% समर्थन मिलने के बाद उन्हें चुना गया.अगले दिन कार्की ने राष्ट्रपति और सेना प्रमुख से मुलाकात की. इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वर पर करीब 1,30,000 सदस्य जुड़े हुए थे. हालांकि, इन यूज़र्स के लोकेशन की पुष्टि नहीं हो सकी. इस कारण यह पता नहीं चल पाया कि वोट सिर्फ नेपाल के यूज़र्स ने दिए या फिर नेपाल के बाहर वाले यूज़र्स ने भी वोट दिए.
Discord ऐप की बात करें तो इसकी मुख्य ताकत इसके सर्वर और चैनल सिस्टम में है. यहां हर मुद्दे के लिए अलग चैनल होता है. उदाहरण के तौर पर अनाउंसमेंट, ग्राउंड अपडेट्स, इमरजेंसी सपोर्ट, और फैक्ट-चेकिंग आदि के लिए अलग-अलग चैनल्स होते हैं. यह स्ट्रक्चर आंदोलन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाती है. Discord ऐप पर इंस्टाग्राम या व्हाट्सएप जैसे ऐप्स की तुलना में काफी कम शोर-शराबा होता है. इस कारण से ज़ेन-ज़ी (साल 1999 या उसके बाद पैदा होने वाले युवा) को यह ऐप काफी अच्छा लगता है.
Discord का इंटरफेस Gen Z के लिए काफी आसान और कंफर्टेबल है. इंस्टाग्राम या एक्स (पुराना नाम ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स काफी सारे फालतू फीड्स भी उपलब्ध होते हैं, जो यूज़र्स का किसी खास चीज से ध्यान भटकाता है. Discord ऐप में ऐसा नहीं है. इस कारण यह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है और नेपाल में एक बड़ा आंदोलन करने में इस ऐप ने एक अहम भूमिका निभाई.


