Saturday, March 28, 2026

नवंबर में वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट, दूध, तेल, चीनी, मीट सस्ते हुए, अनाज महंगा, FAO सूचकांक 125.1, उपभोक्ताओं को राहत.

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 वैश्विक महंगाई के दबाव के बीच नवंबर 2025 उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा महीना साबित हुआ. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार, लगातार तीसरे महीने विश्व स्तर पर खाद्य कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. एफएओ का वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक नवंबर में 125.1 अंक पर रहा, जो अक्तूबर 2025 की तुलना में 1.2 प्रतिशत कम है और मार्च 2022 के रिकॉर्ड स्तर से करीब 22 प्रतिशत नीचे है.

एफएओ ने अपनी सितंबर 2025 की रिपोर्ट में बताया कि विश्व स्तर पर बढ़ती महंगाई के बावजूद नवंबर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी आई है. दूध, तेल, चीनी और मीट जैसी प्रमुख वस्तुओं के भाव घटे, जिससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली. वर्ष दर वर्ष तुलना में भी सूचकांक नवंबर 2024 की तुलना में 2.1 प्रतिशत नीचे रहा.

गेहूं और मक्के के दाम बढ़े
हालांकि अनाज समूह में कीमतों में उछाल देखा गया. नवंबर में अनाज मूल्य सूचकांक 105.5 अंक पर रहा, जो अक्टूबर की तुलना में 1.8 और कुल मिलाकर 1.3 प्रतिशत अधिक है. गेहूं के दाम वैश्विक स्तर पर 2.5 प्रतिशत बढ़े, जिसका कारण चीन द्वारा अमेरिका से बड़े आयात, ब्लैक सी क्षेत्र में तनाव और रूस में अगले वर्ष की फसल के लिए कम बुवाई का अनुमान बताया गया.

मक्के के दाम ब्राजील में मजबूत मांग और अर्जेंटीना-ब्राजील में बारिश से आपूर्ति बाधित होने के कारण बढ़े. इसके अलावा जौ और ज्वार के भाव में भी वृद्धि हुई, जो सोयाबीन की वैश्विक कीमतों के बढ़ने से प्रभावित हुए. वहीं, चावल के दाम 1.5 प्रतिशत घटे. उत्तरी गोलार्ध में फसल कटाई की शुरुआत और इंडिका व सुगंधित चावल की कमजोर आयात मांग इसके प्रमुख कारण रहे.

खाद्य तेल और चीनी में गिरावट
खाद्य तेल मूल्य सूचकांक नवंबर में 165 अंक पर रहा, जिसमें 2.6 प्रतिशत की कमी आई. पाम, सूरजमुखी और रेपसीड तेल के दाम घटे, जबकि सोया तेल थोड़ा महंगा हुआ, जिसका कारण ब्राजील में बायोडीजल की बढ़ती मांग थी. मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन अपेक्षा से अधिक और क्रूड ऑयल के सस्ते होने से वैश्विक बाजार पर दबाव पड़ा.

चीनी मूल्य सूचकांक नवंबर में 88.6 अंक पर रहा, जो अक्टूबर से 5.9 और पिछले साल से 29.9 प्रतिशत कम है. ब्राजील में गन्ने का अधिक हिस्सा चीनी उत्पादन में गया और भारत तथा थाईलैंड में अनुकूल मौसम के कारण उत्पादन बढ़ने के अनुमान ने कीमतों पर और दबाव डाला.

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