नई दिल्ली: भारत सरकार कर प्रणाली में दशकों का सबसे बड़ा सुधार करने जा रही है. 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो जाएगा, जिसका सीधा असर अप्रैल 2027 से भरे जाने वाले इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) पर पड़ेगा. इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य टैक्स भरने की जटिल प्रक्रिया को खत्म कर इसे पूरी तरह डिजिटल और सहज बनाना है.
फॉर्म भरने की झंझट होगी खत्म
नए कानून के तहत, करदाताओं को अब घंटों बैठकर अपनी आय और निवेश का हिसाब नहीं जोड़ना होगा. अधिकांश डेटा आयकर विभाग के पास पहले से उपलब्ध होगा, जिससे ITR फॉर्म पहले से भरे हुए (Pre-filled) मिलेंगे. करदाता को केवल उस डेटा का मिलान करना होगा और यदि सब कुछ सही है, तो एक सिंगल क्लिक से रिटर्न सबमिट हो जाएगा. हालांकि, यदि कोई जानकारी गलत है या छूट गई है, तो उसमें बदलाव करने की पूरी आजादी होगी.
फॉर्मों के नाम और नियमों में बदलाव
नए नियमों (Income Tax Rules 2026) के तहत पुराने फॉर्मों की पहचान बदल जाएगी. प्रसिद्ध फॉर्म 16 अब फॉर्म 130 के रूप में जाना जाएगा, और वार्षिक सूचना विवरण (AIS) देने वाला फॉर्म 26AS अब फॉर्म 168 कहलाएगा. सरकार ने कर कानूनों को सरल बनाने के लिए नियमों की संख्या को 511 से घटाकर 333 और फॉर्मों की संख्या को 399 से कम करके 190 कर दिया है.
क्रिप्टो निवेश पर रहेगी पैनी नजर
वर्ष 2027 से भरे जाने वाले रिटर्न में क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स की जानकारी देना अनिवार्य होगा. भारत अब ओईसीडी के क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) में शामिल हो चुका है, जिससे विदेशी एक्सचेंज भी भारतीय यूजर्स का डेटा सीधे विभाग को सौंपेंगे. जानकारी छिपाने या गलत देने पर ₹50,000 तक का जुर्माना और ₹200 प्रतिदिन की पेनल्टी का प्रावधान किया गया है.
पैन को लेकर हो रहे ये बड़े बदलाव
- एक दिन में 50 हजार रुपये से अधिक नकद बैंक में जमा करने पर पैन नहीं देना पड़ेगा.
- एक वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा और निकासी के लिए पैन अनिवार्य होगा.
- होटल, बैंक्वेट या रेस्टोरेंट के एक लाख रुपये से कम के बिल पर पैन जरूरी नहीं, इससे ज्यादा बिल पर अनिवार्य.
- पांच लाख से अधिक रकम की कार खरीदने पर ही पैन देना अनिवार्य होगा. अभी किसी भी कीमत की कार खरीदने पर पैन देना पड़ता है.
- अब 20 लाख रुपये से अधिक की प्रापर्टी खरीदने पर पैन देना होगा. अभी यह सीमा 10 लाख रुपये है.
- मकान भत्ता दावे के लिए हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शेयरों की श्रेणी में डाला जाएगा.
- 1600 सीसी तक की गाड़ी के लिए प्रतिमाह 8,000 रुपये, इससे ऊपर क्षमता वाली गाड़ी के लिए प्रतिमाह 10,000 रुपये तक का मोटर भत्ता आयकर के दायरे से बाहर.


